
'रूस से हम भी सस्ता तेल खरीदना चाहते थे लेकिन...', इमरान खान ने भारत की तारीफ में फिर पढ़े कसीदे
AajTak
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर भारत की विदेश नीति की तारीफ की है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भी रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना चाहता था, लेकिन नहीं खरीद सका. इससे पहले इमरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर की तारीफ कर चुके हैं.
सत्ता गंवाने के बाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान कानूनी पचड़ों में घिरे हुए हैं. तोशाखाना केस को लेकर उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. इस बीच एक बार फिर इमरान ने भारत की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं.
इमरान खान ने भारत की विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा,'हम (पाकिस्तान) भी भारत की तरह रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना चाहते थे. लेकिन ऐसा करने से पहले ही सरकार गिर गई.' पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (PTI) के प्रमुख इमरान ने राष्ट्र के नाम संबोधित करते हुए कहा कि वह रूस से कच्चा तेल खरीदने ही वाले थे कि अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद सरकार गिर गई.
यह पहली बार नहीं है, जब इमरान खान ने भारत की नीतियों की खुलेआम तारीफ की है. इससे पहले भी इमरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा हमारे विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की भी खुलकर तारीफ कर चुके हैं. मई 2022 में भी इमरान ने मोदी सरकार की तारीफ की थी. तब इमरान ने कहा था कि अमेरिका के दबाव को दरकिनार करते हुए मोदी सरकार ने रूस से तेल खरीदने का फैसला लिया, जो वाकई सराहनीय है.
अमेरिका के दबाव को दरकिनार किया
इमरान ने ट्वीट कर कहा था कि भारत एक तरफ तो क्वाडिलेट्रल सिक्योरिटी डायलॉग (QUAD) का सदस्य है तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के दबाव का सामना करते हुए रूस से सस्ता तेल भी खरीद रहा है. ऐसा करके हमारा पड़ोसी मुल्क अपनी जनता की सुविधाओं को बढ़ा रहा है.
एस जयशंकर की भी तारीफ कर चुके

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








