
रूस की प्राइवेट आर्मी में शामिल हो रहे नेपाली गोरखा! चौंकाने वाली है रिपोर्ट
AajTak
नेपाली गोरखा युद्ध भूमि में अपनी वीरता के लिए जाने जाते हैं. सदियों से वो भारत की सेना में अपना योगदान देते रहे हैं. उन्हें भारतीय सेना में सुगौली की संधि के तहत भर्ती किया जाता रहा है. अब खबर है कि नेपाली गोरखा रूस की प्राइवेट आर्मी में भी भर्ती हो रहे हैं.
युद्ध कौशल में निपुण नेपाली गोरखा रूस की प्राइवेट आर्मी वागनर ग्रुप में शामिल हो रहे हैं. ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि सैकड़ों नेपाली युवा कॉन्ट्रैक्ट पर रूसी सेना में शामिल हो गए हैं. सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिसमें नेपाली युवा रूस में मिलिट्री ट्रेनिंग लेते दिख रहे हैं.
वागनर ग्रुप वही प्राइवेट आर्मी है जिसके मुखिया येवगेनी प्रिगोजिन ने बीते शुक्रवार को रूस के खिलाफ विद्रोह की घोषणा कर दी थी. इसके बाद वागनर ग्रुप मॉस्को की तरफ बढ़ने लगा था लेकिन इसके 24 घंटे के अंदर ही वागनर ग्रुप ने अपने सैनिकों की वापसी की घोषणा कर दी.
वागनर ग्रुप रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ही चर्चा में है. इसी ग्रुप ने यूक्रेन के बखमुत शहर पर कब्जा किया था. बखमुत उत्तरी यूक्रेन में स्थित एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण शहर है. इस शहर पर जीत दर्ज करने के बाद वागनर ग्रुप का महत्व और बढ़ गया है.
नेपाल गोरखा वागनर ग्रुप में क्यों शामिल हो रहे हैं?
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सैकड़ों की संख्या में नेपाली गोरखा रूस के वागनर ग्रुप में शामिल हो रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध में सैनिकों की कमी न हो, इसके लिए रूस ने अपने नियमों में कुछ बदलाव किए हैं ताकि दूसरे देशों के युवा रूसी सेना में शामिल हो सकें.
16 मई को रूस ने अपने नियमों में बदलाव किया जिसके तहत रूसी सेना में एक साल तक सेवा देने के बाद विदेशियों को रूसी नागरिकता मिल जाएगी. इसके तहत विदेशियों को अच्छा वेतन देने की बात कही गई है और रूसी सेना में उनके शामिल होने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया. उसके बाद से ही रूसी सेना में नेपाली गोरखाओं के भर्ती होने की प्रक्रिया में तेजी आई है. रूसी सेना में नेपाल आर्मी से रिटायर हुए गोरखा भी भर्ती हो रहे हैं.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.









