
राहुल गांधी के पास अब क्या हैं कानूनी रास्ते? एक्सपर्ट से जानें 2024 का चुनाव लड़ पाएंगे या नहीं
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी की शुक्रवार को लोकसभा सचिवालय ने संसद सदस्यता रद्द कर दी है. राहुल को एक दिन पहले ही मोदी सरनेम मामले में सूरत की सेशन कोर्ट ने दोषी पाए जाने पर सजा सुनाई थी. अप्रैल 2019 में बीजेपी नेता पूर्णेश मोदी ने राहुल के खिलाफ धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज कराया था. हालांकि, राहुल के पास अन्य कानूनी विकल्प के रास्ते खुले हैं.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई है. इस संबंध में लोकसभा सचिवालय की तरफ से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है. राहुल केरल के वायनाड से सांसद थे. एक दिन पहले ही गुजरात के सूरत की सेशन कोर्ट ने चार साल पुराने मानहानि केस में राहुल को दोषी पाया था और दो साल जेल की सजा सुनाई थी. इसके साथ ही कोर्ट ने निजी मुचलके पर राहुल को जमानत देते हुए सजा को 30 दिन के लिए सस्पेंड कर दिया था. इस बीच, संसद सदस्यता रद्द होने से राहुल गांधी के राजनैतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. आईए जानते हैं राहुल के सामने आगे क्या कानूनी विकल्प के रास्ते खुले हैं....
दरअसल, जनप्रतिनिधि कानून के मुताबिक, अगर सांसदों और विधायकों को किसी भी मामले में 2 साल से ज्यादा की सजा हुई हो तो ऐसे में उनकी सदस्यता (संसद और विधानसभा से) रद्द हो जाती है. इतना ही नहीं सजा की अवधि पूरी करने के बाद छह वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी होते हैं. राहुल को एक दिन पहले ही कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई और दूसरे दिन लोकसभा सचिवालय की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में राहुल की संसद सदस्यता रद्द करने की सूचना दे दी गई है.
क्या कहता है जनप्रतिनिधि कानून...
- साल 1951 में जनप्रतिनिधि कानून आया था. इस कानून की धारा 8 में लिखा है कि अगर किसी सांसद या विधायक को आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाता है, तो जिस दिन उसे दोषी ठहराया जाएगा, तब से लेकर अगले 6 साल तक वो चुनाव नहीं लड़ सकेगा. - धारा 8(1) में उन अपराधों का जिक्र है जिसके तहत दोषी ठहराए जाने पर चुनाव लड़ने पर रोक लग जाती है. इसके तहत, दो समुदायों के बीच घृणा बढ़ाना, भ्रष्टाचार, दुष्कर्म जैसे अपराधों में दोषी ठहराए जाने पर चुनाव नहीं लड़ सकते. हालांकि, इसमें मानहानि का जिक्र नहीं है.
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सजा मिलते ही चली जाती है सदस्यता

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