
राष्ट्रीय आपदा क्या होती है? जानिए जोशीमठ संकट को इस दायरे में लाने की मांग क्यों उठ रही
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जोशीमठ में भू-धंसाव को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की मांग हो रही है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर हुई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उत्तराखंड हाईकोर्ट जाने को कहा है. ऐसे में जानना जरूरी है कि किसी आपदा को राष्ट्रीय आपदा कब घोषित किया जाता है और इससे क्या बदल जाता है?
उत्तराखंड के जोशीमठ शहर में जो कुछ हो रहा है, क्या उसे 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित किया जा सकता है? मांग तो उठी है. सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर हुई. याचिका में मांग हुई कि जोशीमठ में जो जमीन धंस रही है, उसे 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने के लिए अदालत दखल दे. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को उत्तराखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए.
जोशीमठ के भू-धंसाव को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. बेंच ने कहा कि इस मुद्दे को उत्तराखंड हाईकोर्ट को डील करना चाहिए.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सुशील कुमार जैन ने दलील दी कि लोग मर रहे हैं और जमीन धंसने से प्रभावित लोगों को राहत और पुनर्वास के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है.
जोशीमठ में दिन-ब-दिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं. अब तक लगभग 850 घरों में दरारें पड़ चुकीं हैं. इनमें से 165 घर डेंजर जोन में स्थित हैं. ऐसे में लोगों की मांग है कि इसे 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित किया जाए ताकि लोगों को तत्काल मदद मिल सके.
राष्ट्रीय आपदा क्या होती है?
आपदा प्रबंधन को लेकर कानून है. ये कानून दिसंबर 2005 में लागू हुआ था. ये एक केंद्रीय कानून है, जिसका इस्तेमाल केंद्र सरकार करती है, ताकि किसी आपदा से निपटने के लिए देशव्यापी योजना बनाई जा सके.

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