
राम मंदिर की धर्म ध्वजा पर पाकिस्तान की ड्रामेबाजी, कहा- भारत में मुसलमानों की विरासत को खतरा, UN से की ये अपील
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अयोध्या में राम मंदिर पर केसरिया ध्वज की स्थापना पर पाकिस्तान चिढ़ गया है. अपने मुल्क में हिन्दुओं और ईसाइयों की रक्षा करने में नाकाम रहने वाले पाकिस्तान ने राम मंदिर पर केसरिया ध्वज की स्थापना को इस्लामोफोबिया, हेट स्पीच से जोड़ दिया है और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है.
अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा की स्थापना के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया आई है. पाकिस्तान में लगातार धार्मिक अल्पसंख्यकों के शोषण, बलात्कार और हत्याओं पर नजरे फेर लेने वाले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इससे भारत के अल्पसंख्यक और मुस्लिम सांस्कृतिक विरासत को खतरा है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने झूठ का पुलिंदा गढ़ते हुए कहा है कि, 'यह भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर दबाव के एक बड़े पैटर्न और हिंदुत्व की सोच के असर में मुस्लिम सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जानबूझकर खत्म करने की कोशिशों को दिखाता है.'
अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भारत के उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद हुआ है. मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद 25 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने यहां केसरिया ध्वज की स्थापना मंदिर के शिखर पर की है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस पर प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद पर राम मंदिर के निर्माण और ध्वजारोहण को पाकिस्तान ने चिंता और गंभीरता के साथ लिया है.
भारत के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में न रखते हुए पाकिस्तान के विदेश विभाग ने कहा है कि बाबरी मस्जिद सदियों पुरानी एक ऐतिहासिक इबादतगाह थी. इसके बाद पाकिस्तान ने 6 दिसंबर 1992 की घटना की जिक्र किया है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने वाहियात प्रोपगैंडा फैलाते हुए कहा है कि भारत का सिस्टम अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करता है.

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