
रामचरितमानस विवादः स्वामी प्रसाद की मुश्किलें बढ़ीं, लखनऊ में दर्ज हुआ धार्मिक भावनाएं आहत करने का केस
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रामचरितमानस को लेकर विवादित बयान के बाद सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ इस मामले में अब केस दर्ज हो गया है. लखनऊ के हजरतगंज थाने में स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का मुकदमा दर्ज हुआ है.
रामचरितमानस को लेकर टिप्पणी से विवादों में आए समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक दिन पहले ही कहा था कि वे अपने बयान पर कायम हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य के इस बयान के बाद अब उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. पहले सपा ने उनके बयान से किनारा कर लिया तो वहीं अब पुलिस भी एक्शन की तैयारी में है.
यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वामी प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज हुआ है. लखनऊ के हजरतगंज थाने में स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ रामचरितमानस को लेकर टिप्पणी के लिए धार्मिक भावनाएं आहत करने का केस दर्ज हुआ है. ये केस बाजार खाला के निवासी शिवेंद्र मिश्रा की तहरीर पर दर्ज हुआ है. पुलिस ने स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ केस दर्ज होने की पुष्टि की है.
पुलिस के मुताबिक स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 ए, 298, 504 और 153 के तहत दर्ज किया गया है. गौरतलब है कि रामचरितमानस को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य की टिप्पणी से सपा ने किनारा कर लिया था. शिवपाल यादव ने स्वामी प्रसाद के बयान को उनका निजी बताते हुए कहा था कि हम राम और कृष्ण के रास्ते पर चलने वाले लोग हैं.
सपा के बयान से किनारा करने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य की भी सफाई आई थी. स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी बयान को निजी राय बताया था और ये भी कहा था कि हमने किसी धर्म का अपमान नहीं किया है. उन्होंने कहा था कि भगवान राम या रामचरितमानस का अपमान नहीं किया. स्वामी प्रसाद ने ये भी कहा था कि रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर सवाल उठाए हैं जिनमें दलितों और पिछड़ों को अपमानित किया गया है.
क्या है पूरा विवाद
रामचरितमानस की चौपाई को लेकर बिहार के शिक्षा मंत्री का एक बयान आया जिसके बाद इसे लेकर बहस छिड़ गई. कोई समर्थन तो कोई विरोध में उतर आया. बिहार के शिक्षा मंत्री के बयान पर जारी बहस के बीच स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस को बकवास बताते हुए इससे विवादित अंश बाहर करने या इसे बैन करने की मांग कर दी. उन्होंने यहां तक कह दिया कि इसे तुलसीदास ने अपनी खुशी के लिए लिखा है.

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