
यूरोप बनाम ट्रंप का 'बुलडोजर-राज'... लड़ाई बिल्डर और कॉलोनाइजर की, ‘बेचारा' कोई नहीं
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डोनाल्ड ट्रंप अपनी दबंगई और रियल एस्टेट मानसिकता के जरिए एक नया वर्ल्ड ऑर्डर बना रहे हैं. वेनेजुएला, ग्रीनलैंड और पनामा जैसे क्षेत्रों को वो सैन्य और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण 'असेट्स' मानते हैं और इन पर किसी भी तरह से नियंत्रण करना चाहते हैं.
डोनाल्ड ट्रंप अपनी दबंगई और बेहद ताकतवर आर्मी के दम पर दुनिया के हर एक्शन का रुख अपने हिसाब से तय करना चाहते हैं. वेनेजुएला पर हमला हो या ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद, ट्रंप किसी की नहीं सुन रहे हैं. दूसरी ओर इस वक्त पीड़ित पक्ष वो है जिसने सदियों तक दुनिया में अपनी ताकत के दम पर कब्जे किए. कई देशों को उपनिवेश यानी कॉलोनी बनाया. और आज ट्रंप उन्हीं कॉलोनियां पर अपने असेट्स का साम्राज्य खड़ा करना चाहते हैं. इस लड़ाई में ‘बेचारा‘ कोई नहीं है. कोई दूध का धुला भी नहीं.
डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति डिप्लोमेसी नहीं, रीयल एस्टेट मानसिकता से संचालित है. और उनकी इस मानसिकता में जमीन, उसकी लोकेशन और उस पर कंट्रोल सबसे ऊपर है.
ट्रंप डिप्लोमेसी के किसी भी एलिमेंट को नहीं मानते और उनकी दुनिया में भरोसा, स्थिरता और दीर्घकालिक शांति जैसी चीजें अस्तित्व में ही नहीं हैं. उनके लिए किसी इलाके का महत्व वहां के लोगों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानून या मानवीय मूल्यों से तय नहीं होता बल्कि उन्हें बस इस बात से मतलब है कि वो क्षेत्र उन्हें कितनी आर्थिक और सामरिक ताकत देता है, कितनी डील-मेकिंग की गुंजाइश बनाता है और उससे सत्ता का संतुलन किसके पक्ष में झुकता है.
वेनेजुएला और ग्रीनलैंड का मामला इसका सबसे ताजा उदाहरण है जहां दुनिया ने देखा कि ट्रंप कैसे अंतरराष्ट्रीय नियमों को पैरों से कुचलते हुए दादागिरी करते हैं. उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पत्नी समेत रात के अंधेरे में बेडरूम में उठवा लिया. ग्रीनलैंड पर कब्जे की लगातार धमकी दे रहे हैं और बेतुकी बयानबाजी, टैरिफ की धमकी से अपने पिट्ठू यूरोपीय देशों की नींद हराम कर रखी है.
वेनेजुएला, ग्रीनलैंड या पनामा- ट्रंप की नजर में देश नहीं, असेट्स हैं जिनका ‘यूज वैल्यू’ है.
वेनेजुएला हो, ग्रीनलैंड हो या पनामा, डोनाल्ड ट्रंप के लिए ये सिर्फ नक्शे पर बने संप्रभु क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि ऐसे रणनीतिक 'असेट्स' हैं जिनकी एक तय ‘यूज वैल्यू’ है.

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