
यूपी में BJP का है जमाना तो सपा क्यों बन रही दलबदलुओं का सियासी ठिकाना?
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उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल अपने सियासी-सामाजिक समीकरण दुरुस्त करने में जुटे हैं तो नेता अपने सियासी भविष्य के लिए सुरक्षित ठिकाने तलाशने में जुट गए हैं. ऐसे में आयाराम और गयाराम का दौर भी तेजी से शुरू हो गया है. सूबे में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी सत्तासीन है, लेकिन दल बदल करने वाले नेताओं का राजनीतिक ठिकाना और पहली पसंद समाजवादी पार्टी बनती जा रही है.
उत्तर विधानसभा चुनाव में महज एक साल का वक्त बचा है, ऐसे में सूबे की सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है. राजनीतिक दल अपने सियासी-सामाजिक समीकरण दुरुस्त करने में जुटे हैं तो नेता अपने सियासी भविष्य के लिए सुरक्षित ठिकाने तलाशने में जुट गए हैं. ऐसे में आयाराम और गयाराम का दौर भी तेजी से शुरू हो गया है. सूबे में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी सत्तासीन है, लेकिन दल बदल करने वाले नेताओं का राजनीतिक ठिकाना और पहली पसंद समाजवादी पार्टी बनती जा रही है. 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से करीब 2 दर्जन से ज्यादा बसपा नेताओं ने पार्टी कोअलविदा कहकर सपा का दामन थामा तो करीब एक दर्जन से ज्यादा बड़े नेता कांग्रेस का हाथ छोड़कर अखिलेश यादव की साइकिल पर सवार हो चुके हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्या वजह है कि यूपी में बसपा प्रमुख मायावती और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के मुकाबले सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर गैर-बीजेपी नेता ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं?
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