
यूपी पंचायत चुनाव में भाजपा को भारी पड़े किसान और कोरोना
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पिछले वर्ष दिसंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन की तपिश को ठंड करने के लिए भाजपा ने हर संभव प्रयास किए थे. भाजपा पिछले एक वर्ष से पश्चिमी यूपी में पंचायत चुनाव के मद्देनजर व्यूह रचना कर रही थी. बावजूद इसके भाजपा को पंचायत चुनाव के नतीजों में पश्चिम यूपी के जिलों में आशा से विपरीत नतीजे मिल रहे हैं.
पिछले वर्ष दिसंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन की तपिश को ठंड करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हर संभव प्रयास किए थे. भाजपा पिछले एक वर्ष से पश्चिमी यूपी में पंचायत चुनाव के मद्देनजर व्यूह रचना कर रही थी. पंचायत चुनाव के पहले भाजपा ने पश्चिमी यूपी के जिलों को किसान आंदोलन कें प्रभाव से बचाने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की फौज उतार दी थी. बावजूद इसके भाजपा को पंचायत चुनाव के नतीजों में पश्चिम यूपी के जिलों में आशा से विपरीत नतीजे मिल रहे हैं. पश्चिमी यूपी में कृषि कानूनों के विरोध में कई जिलों के किसानों ने दिल्ली जाकर आंदोलन में हिस्सा लिया था. भाजपा के नेता आंदोलन की शुरुआत से ही इसका कोई प्रभाव यूपी के किसानों पर न पड़ने का दावा कर रहे थे. इसके उलट भारतीय किसान यूनियन और राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं ने लगातार कृषि कानून के विरोध में रैलियां शुरू कर दी थीं. पश्चिमी यूपी के डेढ़ दर्जन जिलों में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बीते चार महीनों में दो दर्जन से ज्यादा रैलियां कर कृषि कानून के विरोध में जनमत तैयार करने में जुटे थे. इसकी काट के लिए भाजपा ने भी बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक दिग्गज नेताओं की पूरी फौज उतार दी थी. पंचायत चुनाव के जरिए पश्चिमी यूपी में पूर्ण वर्चस्व हासिल कर किसन आंदोलन को निष्प्रभावी बनाने की पूरी कोशिश भाजपा के शीर्ष नेताओं ने की थी. भाजपा ने मुख्य फोकस जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव पर किया था जिसके जरिए जिला पंचायत अध्यक्षों का चुनाव होना है. पंचायत चुनाव के प्रत्याशी भी भाजपा ने प्रदेश स्तर से काफी मंथन के बाद ही घोषित किए थे. पंचायत चुनाव की मतगणना जारी है और पश्चिमी यूपी के छह जिलो में जिला पंचायत सदस्यों के 220 वार्डों में भाजपा को करीब 50 सीटें ही मिलती दिख रही हैं. मेरठ जिले में भाजपा के छह विधायक, एक सांसद और दो राज्यसभा सदस्य, दो विधान परिषद सदस्य हैं. यहां पर भाजपा 33 में से अबतक छह सीटें ही जीत पायी है. पिछले चुनाव में भाजपा के 10 सदस्य जीते थे. इस बार भाजपा का दावा 20 से ज्यादा सदस्यों के जीतकर आने का था.
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