
यासीन मलिक के केस से दिल्ली हाईकोर्ट के जज ने खुद को अलग किया, क्या है पूरा मामला?
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दिल्ली हाईकोर्ट में जज जस्टिस अमित शर्मा ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया है. इसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले को दूसरे बेंच के पास भेज दिया है. अब अदालत में इस मामले पर नौ अगस्त को सुनवाई होगी.
टेरर फंडिंग मामले में अलगाववादी नेता यासीन मलिक (Yasin Malik) को मौत की सजा देने की मांग वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई करने वाले जज ने खुद को अलग कर लिया है.
दिल्ली हाईकोर्ट में जज जस्टिस अमित शर्मा ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया है. इसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले को दूसरे बेंच के पास भेज दिया है. अब अदालत में इस मामले पर नौ अगस्त को सुनवाई होगी.
टेरर फंडिंग मामले में यासीन मलिक आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. लेकिन एनआईए ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मलिक को मौत की सजा देने की मांग की है. दरअसल निचली ्दालत ने टेरर फंडिंग मामले में यासीन मलिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
यासीन मलिक को मिली है उम्रकैद
2017 में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने यासीन मलिक समेत कई अलगाववादी नेताओं के खिलाफ टेरर फंडिंग का केस दर्ज किया. इन पर पाकिस्तान से पैसे लेकर कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद बढ़ाने का आरोप लगा. मई 2022 को एनआईए कोर्ट ने यासीन मलिक को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
2017 में NIA ने यासीन मलिक पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) की धारा 16 (आतंकी गतिविधि), धारा 17 (आतंकी फंडिंग), धारा 18 (आतंकी गतिविधि की साजिश) और धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होना) सहित आईपीसी की धारा 120-B (आपराधिक साजिश) और 124-A (राजद्रोह) के तहत केस दर्ज किया गया था. यासीन मलिक ने खुद अपना गुनाह कबूल किया था.

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