
मीरारोड सांप्रदायिक हिंसा मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला, 14 आरोपियों को दी जमानत
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने मीरारोड सांप्रदायिक हिंसा मामले में 14 आरोपियों को जमानत दे दी है. न्यायमूर्ति एन जे जमदार की एकल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्राथमिक तौर पर यह साबित नहीं होता कि आरोपियों ने पूर्व नियोजित तरीके से हमला किया था. कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और चूंकि आरोपी समाज में समायोजित हैं, इसलिए उनसे भागने की संभावना कम है.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मीरारोड सांप्रदायिक हिंसा मामले में गिरफ्तार 14 लोगों को जमानत दे दी है. यह हिंसा जनवरी 2024 में राम मंदिर के उद्घाटन समारोह की शोभा यात्रा के दौरान हुई थी. न्यायमूर्ति एन. जे. जमादार की एकलपीठ ने जमानत मंजूर करते हुए कहा कि आरोपियों की आगे की हिरासत अब उचित नहीं है, क्योंकि उनके खिलाफ साजिश या हिंसा में प्रत्यक्ष शामिल होने के ठोस प्रमाण नहीं हैं.
अदालत की अहम टिप्पणियां
अदालत ने कहा कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जो यह स्थापित करे कि हिंसा पूर्व-नियोजित थी. शोभा यात्रा का उस क्षेत्र से गुजरना महज एक संयोग था. अदालत ने पाया कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों को हिंसा में शामिल होते हुए नहीं दिखाया गया है. पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर ली है. इसके अलावा आरोपियों के समाज में स्थायी संबंध हैं, जिससे उनके फरार होने की संभावना नहीं है.
पीठ ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि आरोपी जनवरी से हिरासत में हैं और ऐसा लगता है कि मुकदमा जल्द ही समाप्त होने की संभावना बहुत कम है. इसलिए, उन्हें आगे हिरासत में रखना अनुचित होगा.
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दरअसल, जनवरी 2024 में राम मंदिर उद्घाटन समारोह के उपलक्ष्य में निकाली गई एक शोभा यात्रा के दौरान, आरोपियों पर कथित तौर पर 50-60 लोगों की भीड़ का हिस्सा बनकर हमला करने और धार्मिक नारे लगाने का आरोप लगाया गया था. पुलिस ने आरोपियों को दंगा, आपराधिक साजिश और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया था.

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