
मायूस चेहरे, रूंधे गले और भविष्य की चिंता... दिल्ली में Bike Taxi बैन होने से बेपटरी हुई इनकी जिंदगी
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दिल्ली में बाइक टैक्सी (ओला, उबर, रैपिडो) पर बैन लगने के बाद इस व्यापार से जुड़े लोगों के सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा हो गया है. दिल्ली में एक लाख से ज्यादा बाइक टैक्सी राइडर हैं. इन सभी का जीवन बाइक टैक्सी के जरिए होने वाली कमाई से चल रहा था. मगर, अब सभी की कमाई ठप हो गई है. आगे पढ़िए इनकी रुला देने वाली कहानी...
दिल्ली में मेट्रो की भीड़ और कैब के महंगे किराए के बीच आम आदमी फंसा हुआ था. तभी उसे एक राहत की सांस लेने का उस वक्त मौका मिला, जब बाइक टैक्सी का ऑप्शन सामने आया. बाइक टैक्सी घर और ऑफिस के बीच दौड़ लगाने वाले आम आदमी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं थी, क्योंकि एक तो इसके जरिए ट्रैफिक में फंसने की कम से कम गुंजाइश थी. साथ ही इसका किराया प्राइवेट कैब से कहीं ज्यादा कम और किफायती था.
देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में इसकी डिमांड दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. इसी बीच अचानक बाइक टैक्सी को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने बाइक टैक्सी को मोटर व्हीकल एक्ट के हिसाब से अवैध बता दिया. इसके बाद हाल ही में दिल्ली में भी दिल्ली सरकार ने बाइक टैक्सी को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का आदेश जारी कर दिया.
'दिल्ली में एक लाख से ज्यादा बाइक टैक्सी राइडर'
बात सिर्फ दिल्ली की करें तो यहां एक लाख से ज्यादा बाइक टैक्सी राइडर हैं. इन सभी का जीवन बाइक टैक्सी के जरिए होने वाली कमाई से चल रहा था. मगर, अब सभी की कमाई ठप हो गई है. दिल्ली के रहने वाले बाइक टैक्सी राइडर नरेंद्र कहते हैं कि कोरोना काल से पहले वो पेंट का काम करते थे. कोरोना में उनका काम लगभग बंद हो गया. इसके बाद उन्हें बाइक टैक्सी के बारे में मालूम पड़ा और उन्होंने यह काम करना शुरू कर दिया.
'इस उम्र में कोई और काम मिल नहीं रहा'
नरेंद्र बताते हैं, "उनका एक बेटा और एक बेटी है. कोविड में बच्चों की पढ़ाई बेहद प्रभावित हुई. बेटा 5th क्लास में होना चाहिए था लेकिन वो अभी 1st में है. एक टाइम पर फीस न भर पाने से बच्चों को स्कूल भी छोड़ना पड़ा लेकिन बाइक टैक्सी के जरिए जीवन थोड़ा संभल गया. बच्चे भी स्कूल जाने लगे और उनके लिए ही बाइक टैक्सी राइडर का काम करना शुरू किया. मगर अब फिर से यह काम बंद हो गया है. इस उम्र में कोई और काम मिल नहीं रहा है. अब समझ नहीं आ रहा कि बच्चों की फीस कैसे भरूं. उनकी पढ़ाई पर एक बार फिर संकट खड़ा हो गया है".

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