
महीनों से समंदर में पड़े हैं बिन बिके रूसी तेल टैंकर! ट्रंप के एक ऑर्डर से इन देशों की लगी 'लॉटरी'
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अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई है. कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं और इसी बीच अमेरिका के एक फैसले ने समंदर में पड़े रूसी तेल के लिए कई खरीददार खड़े कर दिए हैं. अब वो देश भी रूसी तेल खरीद पाएंगे जो प्रतिबंधों के कारण नहीं खरीद रहे थे.
ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की जंग ने तेल बाजार में हलचल मचा दी है. कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर चला गया है जिसे देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल को वैश्विक बाजार में आने की अस्थायी छूट दे दी है. अमेरिका ने इससे पहले भारत को रूसी तेल खरीदने की 30 दिनों की छूट जारी की थी और अब दुनियाभर के देशों के लिए रूसी तेल उपलब्ध हो गया है.
अमेरिका की यह छूट पहले से समंदर में मौजूद रूसी तेल की खरीद पर ही लागू होती है. इस छूट के बीच खबर आ रही है कि रूसी कच्चे तेल और ईंधन से भरे लगभग 30 टैंकर एशियाई समुद्र में मौजूद हैं. एशिया के देश अब रूस के इस तेल और गैस को बिना किसी रोकटोक के खरीद सकते हैं.
ब्लूमबर्ग की तरफ से जमा किए गए जहाज-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार इन जहाजों में कम से कम 1.9 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल और लगभग 3.10 लाख टन पेट्रोलियम रिफाइंड प्रोडक्ट मौजूद हैं. इन प्रोडक्ट्स में मुख्य रूप से नाफ्था शामिल है, जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक बनाने में होता है, और कुछ मात्रा में डीजल भी है.
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान ने दबाव बनाने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है जिससे तेल-गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है. यह स्ट्रेट मध्य-पूर्व के तेल और गैस सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के कुल तेल कारोबार का 20% हिस्सा तेल गुजरता है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल, गैस की सप्लाई में रुकावट आई है.
रूस के कितने जहाजों पर लदा है कच्चा तेल?
रिपोर्ट के मुताबिक, एशियाई समंदर में खड़े रूसी जहाजों में से 25 जहाजों में कच्चा तेल लदा हुआ है. इनमें सोकोल जैसे ग्रेड भी शामिल हैं, जो चीन के पास मौजूद जहाजों पर हैं. इसके अलावा अरब सागर में भी कई टैंकर हैं, जिनमें मुख्य रूप से रूसी तेल यूराल ब्लेंड भरा हुआ है. ये टैंकर महीनों से समंदर में बिना बिके खड़े हैं लेकिन ट्रंप के ऑर्डर के बाद एशियाई देश धड़ल्ले से इन्हें खरीद सकते हैं.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.

ईरान ने पहली बार अपनी घातक मिसाइल सेजिल का इस्तेमाल कर इजरायल पर हमला किया है. इस हमले से ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ 54वां चरण शुरु कर दिया है. IRGC के ऐरोस्पेस प्रमुख ने बताया कि सेजिल मिसाइल से कमांड और कंट्रोल केंद्रों पर मला किया. इस मिसाइल में ईरान के अंदर से इजरायल को निशाना बनाने की पूरी क्षमता है.









