
महाराष्ट्र सीएम के रूप में देवेंद्र फडनवीस पहनेंगे कांटों का ताज, सामने होंगी ये 5 चुनौतियां |Opinion
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राजनीतिक स्थिरता केवल विधायी बहुमत से नहीं आती. असुरक्षित साझेदार और एक मजबूत विपक्ष सरकार की राजनीतिक क्षमता को हर अवसर पर परखेंगे. इस तरह देवेंद्र फडणवीस के सामने बहुत सी चुनौतियां हैं, जिनसे पार पाना आसान नहीं होगा.
महाराष्ट्र के सीएम के रूप में आज तीसरी बार देवेंद्र फडणवीस शपथ ले रहे हैं. महायुति को प्रचंड बहुमत दिलाने में उनकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता. राज्य में बीजेपी की ओर से सबसे अधिक रैलियां करने वाला यह मराठा पेशवा अपनी रणनीति के बदौलत बीजेपी को अब तक की सबसे बड़ी सफलता दिलाने में कामयाब हुआ है. पर चुनाव जीतने से बड़ी कामयाबी महाराष्ट्र में सरकार चलाना है. फिलहाल पिछली महायुति सरकार ने जनता से इतने वादे किए हैं कि लोगों की उम्मीदों का पहाड़ बहुत बड़ा हो गया है. जिससे पार पाना आसान नहीं होगा. यही नहीं सहयोगियों के साथ इस तरह बैलेंस बिहेवियर करना होगा जिससे वो न तो सर पर चढ़ें और न ही ब्लेकमेलिंग करने पर उतारूं हो जाएं. हमलावर सिर्फ विपक्ष ही नहीं होगा, अंदर से भी वॉर होंगे जिससे बचते हुए महाराष्ट्र को ऊंचाइयों पर ले जाना होगा. फिलहाल ताजपोशी के तुरंत बाद देवेंद्र फडणवीस को कुछ चुनौतियों से तुरंत दो चार होना होगा.
1-लाडकी बहिन जैसी योजनाओं की राशि बढ़ाना
विधानसभा चुनावों से पहले ही बड़ी मात्रा में रियायतें घोषित और लागू कर दी गई थीं। सरकार की पहली प्राथमिकता इन वादों को न्यूनतम रिसाव के साथ लक्षित तरीके से पूरा करना होनी चाहिए, ताकि वित्तीय स्थिति स्थिर हो सके। महायुति ने लाडकी बहन योजना के तहत पात्र महिलाओं को मिलने वाली राशि को ₹1,500 से बढ़ाकर ₹2,100 प्रति माह करने का वादा किया था. यही नहीं किसान सम्मान निधि की राशि भी 12 हजार से 15 हजार करने का वादा है. इसके अलावा किसानों की ऋण माफी , वृद्धावस्था पेंशन आदि में भी बढ़ोतरी आदि की बात है. जाहिर है कि इन वादों को पूरा करने में राज्य के जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए धन की उपलब्धता मुश्किल हो सकती है. राज्य का कर्ज ₹7.82 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. जबकि राजस्व वृद्धि जहां था वही है. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो सकता है. देश के प्रमुख विकास इंजन के रूप में, अगर महाराष्ट्र वित्तीय गैर-जिम्मेदारी का प्रतीक बन जाए, तो यह एक त्रासदी होगी.
2-बीएमसी चुनाव
महाराष्ट्र में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी बीएमसी का चुनाव जीतना.कहा जाता है कि बीएमसी को जीतना किसी राज्य के विधानसभा चुनाव जीतने जितना ही अहम होता है. एकनाथ शिंदे बीएमसी चुनावों तक खुद को सीएम बनाए रखने की मांग कर रहे थे. पर बीजेपी राजी नहीं हुई. दरअसल बीएमसी पर 3 दशक से शिवसेना (अविभाजित) का कब्जा है.अब शिवसेना बंट चुकी है. पर जिस तरह शिंदे को बीजेपी ने मुख्यमंत्री पद से हटाया है उसका फायदा शिवसेना (यूबीटी) उठाने की कोशिश करेगी. हो सकता है कि अंदर ही अंदर एकनाथ शिंदे भी यही चाहें कि महायुति ये चुनाव हार जाए. इसलिए अगर सरकार पर अपनी पकड़ मजबूती से बनाए रखनी है तो हर हाल में फडणवीस को बीएमसी का चुनाव जीतकर दिखाना होगा.
3-राजनीति साझेदारों के साथ पावर शेयरिंग

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