
महाराष्ट्र में सरकार किसी की भी रही, 'डिप्टी' अजित पवार ही रहे... ऐसी रही 45 साल की पॉलिटिक्स!
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महाराष्ट्र की राजनीति के बेताज बादशाह कहे जाने वाले अजित पवार का बुधवार को निधन हो गया और गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार होगा. अजित पवार ने अपने राजनीतिक जीवन में फर्श से अर्श तक का सफर तय किया और राज्य में किसी भी की सरकार रही हो, लेकिन डिप्टीसीएम की कुर्सी उनके नाम रही.
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी के प्रमुख रहे अजित पवार का बुधवार सुबह प्लेन क्रैश में निधन हो गया. अजित पवार का विमान महाराष्ट्र के बारामती में लैंड करने की कोशिश कर रहा था, तभी यह हादसा हुआ. विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई है. अजित पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान के मैदान पर होगा.
अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति में और उनके छत्रछाया में सियासी ककहरा सीखा, लेकिन समय के साथ वे खुद महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में उभर आए. पिछले 16 साल महाराष्ट्र में किसी की भी सरकार रही हो, लेकिन डिप्टी सीएम की कुर्सी अजित पवार के पास ही रही.
अजित पवार अपने 45 साल के राजनीतिक सफर में एक बार सांसद, 7 बार विधायक और छह बार डिप्टी सीएम रहे. यही नहीं महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाले वो वित्त मंत्री रहे हैं. महाराष्ट्र की राजनीति के सियासी धुरी माने जाते थे, जिसके चलते ही सीएम फडणवीस ने उन्हें अपने सियासी बैलेंस को बनाए रखने के लिए साथ मिला रखा था.
अजित पवार की राजनीतिक सफर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार के पीढ़ी में उनके परिवार से कोई भी राजनीति में नहीं आया. शरद पवार के भाई अनंतराव के बेटे अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के देओलाली प्रवरा में हुआ. शरद पवार के सियासत में सक्रिय होने की वजह से अजित पवार को बचपन से सियासी माहौल मिला. अजित पवार ने शरद पवार की उगली पकड़कर राजनीति में एंट्री की और अपने चाचा की छत्र-छाया में रहते हुए ही राजनीति का पाठ सीखा था.
साल 1982 में अजित पवार ने राजनीति में क़दम रखा, जब वे एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड में चुने गए.इसके बाद अजित पवार ने पलटकर नहीं देखा और दिन ब दिन सियासी बुलंदी छूते गए. 1991 में वे पुणे ज़िला सहकारी बैंक के चेयरमैन बने. अजित पवार साल 1991 में ही पहली बार बारामती से कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए.
हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए इसे खाली कर दिया. फिर इसी सीट पर उपचुनाव में शरद पवार जीते जो पीवी नरसिंहा राव की सरकार में रक्षा मंत्री बने. इसके बाद अजित पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति में किस्मत आजमाने का फैसला किया और 1995 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े तो फिर कभी नहीं हारे.इसके बाद लगातार 8 बार विधायक रहे.

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