
मरे हुए ड्राइवरों के DL, ऑटो रिक्शा परमिट में करते थे फर्जीवाड़ा, दिल्ली के बुरारी RTO के मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर समेत 14 अरेस्ट
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भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने ऑटो रिक्शा परमिट के रिनोवेशन और ट्रांसफर मामले में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है. एजेंसी ने इस मामले में मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर समेत 14 लोगों को अरेस्ट किया है. दरअसल ऑटो संघ की रिट याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने 12 मई 2022 को भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद एसीबी ने यह खुलासा किया.
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने गुरुवार को फर्जी ऑटो परमिट के मामले में एक मोटर वाहन इंस्पेक्टर समेत 14 लोगों को अरेस्ट किया है. इन गिरफ्तार लोगों में 10 हाई प्रोफाइल ऑटो फाइनेंसर, डीलर और तीन दलाल भी शामिल हैं. उन पर मिली भगत करके फर्जीवाड़े से बुराड़ी परिवहन प्राधिकरण में ऑटो-रिक्शा परमिट का गलत तरीके से ट्रांसफर और रिन्यूअल करवाने का आरोप है. अधिकारियों ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद एजेंसी द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप की जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है.
एसीबी ने कई ऑटो-रिक्शा यूनियनों द्वारा दायर एक रिट याचिका पर पिछले साल मई में पारित दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद यह जांच की थी. संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) मधुर वर्मा ने बताया कि रिट याचिका में ऑटो-रिक्शा के कई रजिस्ट्रेशन ऐसे नंबरों का उल्लेख पीड़ितों और मामलों के रूप में किया गया था, जिसमें अवैध घोषित कर दिया गया था.
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया था कि ऑटो-रिक्शा फाइनेंसरों और डीलरों का इस ट्रेड पर कंट्रोल था, जिस कारण पीड़ित ड्राइवर और ऑटो-रिक्शा के मालिक असहाय हो गए थे. पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच में अपराध की पुष्टि हुई.
मधुर वर्मा ने बताया कि जांच के दौरान ऑटो-रिक्शा से संबंधित बड़ी संख्या में मूल रजिस्ट्रेशन की फाइलें बुराड़ी परिवहन प्राधिकरण से मिलीं. इसके बाद पिछले परमिट धारकों और वर्तमान परमिट धारकों की जांच की गई. इसके बाद फर्जी और मनगढ़ंत आवेदनों के आधार पर परमिट का स्थानांतरण और नवीनीकरण में प्राधिकरण के अधिकारियों, दलालों और डीलरों की भूमिका का पता चला.
जेसीपी ने बताया कि पीड़ितों और मृतक परमिट धारकों के परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने ऑटो-रिक्शा परमिट के हस्तांतरण और नवीनीकरण के लिए कभी कोई आवेदन नहीं दिया है. पता चला कि वर्ष 2021 में कई मामलों में परमिट धारकों की मृत्यु बहुत पहले ही हो गई थी. इसके बाद फर्जी आवेदनों के आधार पर उनके परमिट अन्य लोगों के नाम पर स्थानांतरित कर दिए गए. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 7 के प्रावधान और भारतीय दंड संहिता की अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.

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