
मध्य प्रदेश कांग्रेस 'टैलेंट हंट' से ढूंढेगी प्रवक्ता, BJP का तंज- एक्सपीरियंस की ज्यादा जरूरत है
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मध्य प्रदेश कांग्रेस में अब 'टैलेंट' की खोज ने सियासी पारा गरमा दिया है. संगठन को नया रूप देने और बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत और तार्किक आवाज तैयार करने के लिए यह नया प्रयोग शुरू किया है. जहां कांग्रेस इसे संगठन का 'रिफ्रेशमेंट' बता रही है, वहीं बीजेपी ने इसे कांग्रेस का 'दिवालियापन' करार दिया है.
मध्य प्रदेश की सियासत में अब 'टैलेंट' भी बहस का विषय बन गया है. प्रदेश कांग्रेस ने संगठन में नए और ऊर्जावान चेहरों को मौका देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए प्रवक्ताओं के चयन के लिए ‘टैलेंट हंट प्रोग्राम’ शुरू किया है. हालांकि इस पहल पर बीजेपी ने तंज कसते हुए कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए हैं.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा की. उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी को ऐसे प्रवक्ताओं की जरूरत है जो वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध हों, समसामयिक मुद्दों पर गहरी पकड़ रखते हों और कांग्रेस की विचारधारा को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचा सकें. पार्टी का दावा है कि अब चयन प्रक्रिया योग्यता, अध्ययन और संवाद क्षमता के आधार पर होगी.
क्या है टैलेंट हंट की पूरी प्रक्रिया? • कार्यक्रम जिला, संभाग, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक आयोजित होगा • 28 फरवरी तक आवेदन जमा किए जा सकेंगे • संभाग स्तर पर इंटरव्यू होंगे • AICC नामित कोऑर्डिनेटर, टैलेंट हंट कमेटी, वरिष्ठ नेता और जिला अध्यक्ष मिलकर मूल्यांकन करेंगे • अंतिम निर्णय अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी लेगी • 20 प्रदेश प्रवक्ताओं का चयन किया जाएगा • साथ ही मीडिया पैनलिस्ट, संभाग और जिला स्तर पर दो-दो अधिकृत प्रवक्ता, राष्ट्रीय स्तर पर दो पैनलिस्ट और एक विशेष अंग्रेजी मीडिया पैनलिस्ट नियुक्त किए जाएंगे.
इस बीच बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा समेत मंत्रियों गोविंद सिंह राजपूत और प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए कहा कि पार्टी में टैलेंट की कमी है, इसलिए बाहर से तलाश की जा रही है.
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने तो कहा कि कांग्रेस को टैलेंट से ज्सादा एक्सपियरेंस की जरूरत है नहीं तो सब एक-एक कार कांग्रेस छोड़ कर चले जाएंगे.
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश की राजनीति में अब प्रवक्ताओं का चयन भी सियासी संग्राम का हिस्सा बन गया है. एक तरफ कांग्रेस नई ऊर्जा के साथ संगठन को धार देने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे कांग्रेस की मजबूरी बता रही है.

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