
मंत्री रामकिसून और MP विष्णु पांडे.... भारत से 14 हजार KM दूर संसद में शुद्ध हिंदी में बहस!
AajTak
भारत से 14000 किलोमीटर दूर गुयाना की संसद में हिंदी की गूंज भारत में हिंदी प्रेमियों को खुश कर गई है. यहां जब विपक्ष के नेता ने मंत्री महोदय के हिंदी ज्ञान पर सवाल उठाया तो उन्होंने कहा कि वो हिंदी में बहस कर लें. कहीं भी, कभी भी.
"माननीय अध्यक्ष महोदय, आदरणीय सदस्य माननीय विष्णु पांडे, मैं अभी इसी वक्त उनको चुनौती देता हूं कि किसी भी स्तर पर, किसी भी जगह पर जाकर विषय वो तय करेंगे." शब्द यही थे. हिंदी में. एकबारगी पढ़कर यही लगता है कि ये भारत के किसी सदन की कार्यवाही का हिस्सा है. लेकिन ये आधा सच है. ये बहस भारत की नहीं है.
भारत से हजारों किलोमीटर दूर इस देश की संसद में सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच हुई बहस भारत में चर्चा का विषय बन गई. यू तों ये बहस उस देश के मुद्दों पर ही थी. लेकिन हिंदी में हुई इस बातचीत को सुनकर ऐसा लगता है कि जैसे ये भारत के संसद की बात हो.
पक्ष-विपक्ष के बीच हिंदी में ये टकराव गुयाना की संसद में हुई है. गुयाना में भारत के उच्चायुक्त ने इस वीडियो को एक्स पर पोस्ट किया है.
दरअसल गुयाना की संसद में हिंदी में हुई इस चर्चा ने सबका ध्यान खींचा है.
यहां गुयाना के कृषि राज्य मंत्री और भारतीय मूल के सांसद विकास रामकिसून पर विपक्षी सदस्यों ने हिंदी बोलने की क्षमता पर सवाल उठाया. विपक्षी सांसद विष्णु पांडे समेत दूसरे सांसदों ने दावा किया कि रामकिसून को हिंदी नहीं आती या उनकी समझ कम है.
🚨 Hindi dominates Guyana Parliament After the Opposition questioned his Hindi-speaking ability, MP Vikash Ramkisoon HIT BACK in fluent Hindi, saying: “Main unhe chunauti deta hoon, vishay woh tay karenge, aur main abhi bina kagaz ke debate karoonga.” 🔥 pic.twitter.com/FkbIek5dbp

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.








