
भारत-PAK सीजफायर में कथित भूमिका के लिए ट्रंप के सलाहकार को सम्मान... जानें कौन हैं भारतीय मूल के रिकी गिल
AajTak
37 वर्षीय रिकी गिल का जन्म न्यू जर्सी के लोदी में पंजाबी सिख प्रवासी डॉक्टर माता-पिता के घर हुआ. रिकी गिल का करियर कम उम्र से ही चर्चा में रहा है. गिल को भारत-पाकिस्तान में सीजफायर में कथित नेगोशिएशन भूमिका के लिए डिस्टिंग्विश्ड एक्शन अवॉर्ड दिया गया है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर चला आ रहा विवाद एक बार फिर गहरा गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय मूल के करीबी सलाहकार रिकी गिल को इस युद्धविराम की कथित नेगोशिएशन भूमिका के लिए नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (NSC) का डिस्टिंग्विश्ड एक्शन अवॉर्ड दिया गया है.
इस फैसले को भारत में महज एक सम्मान नहीं, बल्कि अमेरिका की ओर से श्रेय लेने की राजनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. रिकी गिल वर्तमान में NSC में दक्षिण और मध्य एशिया के वरिष्ठ निदेशक और राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष सहायक हैं. उन्हें यह पुरस्कार अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने प्रदान किया.
हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि भारत-पाक सीजफायर में गिल की भूमिका वास्तव में क्या थी. यह भी उल्लेखनीय है कि भारत सरकार कई बार दो टूक शब्दों में कह चुकी है कि 10 मई को हुए युद्धविराम में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं हुई थी.
कौन हैं रिकी गिल?
37 वर्षीय रिकी गिल का जन्म न्यू जर्सी के लोदी में पंजाबी सिख प्रवासी डॉक्टर माता-पिता के घर हुआ. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में वे भारत-पाकिस्तान, अफगानिस्तान और पूरे दक्षिण-मध्य एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र का दायित्व संभाल रहे हैं. इससे पहले वे ट्रंप के पहले कार्यकाल में NSC में रूस और यूरोपीय ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े अहम पद पर भी रह चुके हैं.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









