
भारत से असम को अलग करने का इरादा रखने वाले अलगाववादी कमांडर को 'गेस्ट' क्यों बनाना चाहते हैं हिमंता?
AajTak
असम के मु्ख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उस संगठन के कमांडर को असम में आने का न्योता दिया है, जिसे भारत सरकार ने प्रतिबंधित किया है. सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने परेश बरुआ को असम आने का प्रस्ताव देते हुए कहा है कि उन्हें असम में 10 दिन गुजारकर राज्य में आए बदलाव को महसूस करना चाहिए.
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उग्रवादी संगठन उल्फा-स्वतंत्र (ULFA-Independent) के कमांडर परेश बरुआ को बतौर मेहमान असम में बुलाया है. हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि उल्फा चीफ को बदले हुए असम को देखना चाहिए. हिमंता बिस्वा सरमा ने उल्फा (आई) के प्रमुख परेश बरुआ को एक 'अतिथि' के तौर पर राज्य की यात्रा करने और दशकों बाद बदली हुई स्थिति का गवाह बनने के लिए आमंत्रित किया.
उल्फा को भारत सरकार उग्रवादी संगठन मानती है और इसे प्रतिबंधित किया गया है. ULFA-I स्वतंत्र असम की मांग करती आई है और इस भूभाग को भारत से अलग करना चाहती है. ULFA-I के कमांडर रहे परेश बरुआ पूर्वोत्तर के अलगाववादी आंदोलनों का प्रमुख चेहरा रहे हैं.
परेश बरुआ के नेतृत्व में ULFA-I ने असम में कई हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया है. कुछ साल पहले ULFA-I ने भारत की दिग्गज पेट्रोलियम कंपनी ओएनजीसी के तीन कर्मचारियों को किडनैप कर लिया था. 2020 में ULFA-I और एनएससीएन-के ने मिलकर फिरौती के लिए दिल्ली स्थित तेल और गैस कंपनी क्विप्पो के दो कर्मचारियों का अपहरण कर लिया था. हालांकि बाद में दोनों को बिना किसी नुकसान के रिहा कर दिया है.
हिमंता ने उग्रवादी संगठन के कमांडर को क्यों दिया न्योता?
असम सीएम हिमंता ने कहा है कि परेश बरुआ को असम के बदलाव का गवाह बनने के लिए यहां कम से कम एक सप्ताह गुजारना चाहिए. सीएम हिमंता ने कहा, "परेश बरुआ खुद एक जानकार व्यक्ति हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि वह आएंगे क्योंकि मैंने उन्हें आमंत्रित किया है. उसके पास अपनी बुद्धि और तर्क है. हालांकि, मुझे लगता है कि अगर वह सिर्फ सात दिन असम में रहेंगे, तो उन्हें एहसास होगा कि पुराना असम बहुत बदल गया है."
बदले असम को देखने के लिए आएं बरुआ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक नया दिलचस्प रिकॉर्ड और जुड़ गया है. पहले गुजरात के सीेम के रूप में और अब प्रधानमंत्री का पद संभालते हुए अपने 8 हजार 931 दिन पूरे करते हुए नया रिकर्ड बना लिया है. इस उपलब्धि के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह समेत अन्य नेताओं ने पीएम मोदी को बधाई दी.

मथुरा में फरसा वाले बाबा की मौत को लेकर फैली अफवाहों और बवाल के बाद पुलिस ने स्पष्ट किया कि ये हत्या नहीं, बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था और गौ तस्करी से इसका कोई संबंध नहीं है. अफवाहों के कारण इलाके में पथराव और हंगामा हुआ, जिसमें पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में लेकर जांच शुरू कर दी है.

मथुराक के कोसी कला इलाके में एक ट्रक से दूसरे ट्रक में हुई टक्कर में गौरक्षक चंद्रशेखर उर्फ फरसे वाले बाबा की मौत हो गई थी. इस मामले में घायल ट्रक चालक की भी इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई है. पुलिस का कहना है कि इस मामले को गौतस्करी कहकर अफवाह फैलाई गई और हाइवे जाम करने के साथ पथराव किया गया. इस पूरे मामले को लेकर केस दर्ज कर 13 लोगों को अरेस्ट किया गया है.










