
भारत में कोरोना की चौथी लहर का खतरा बढ़ा, क्या हाइब्रिड इम्यूनिटी से रुकेगी चीन जैसी तबाही?
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चीन में कोरोना के BF.7 वैरिएंट से मची तबाही को देख भारत अलर्ट मोड पर है. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछली कोरोना की लहर में चीन में कोरोना केस बढ़ने के 30-40 दिन बाद भारत में कोरोना के मामले बढ़ते दिखे थे. इस बार भी नए साल में कोविड को लेकर असली तस्वीर जनवरी तक ही पता चलेगी. हालांकि, कोरोना टास्क फोर्स के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा का दावा है कि भारत में चीन जैसे हालात बनने की गुंजाइश ना के बराबर है क्योंकि यहां के लोगों में हाइब्रिड इम्युनिटी बन चुकी है.
चीन के बाद अब जापान और अमेरिका समेत कई देशों में कोरोना से हालात बिगड़ने लगे हैं. भारत में संक्रमण फिलहाल काबू में है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ साल के ट्रेंड को देखते हुए जनवरी में कोरोना के मामले बढ़ सकते हैं. हालांकि कोरोना टास्क फोर्स के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा का दावा है कि भारत में हाइब्रिड इम्युनिटी की वजह से चीन जैसे हालात बनने की संभावना बहुत कम है.
COVID-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई मजबूत 'हाइब्रिड इम्युनिटी' की वजह से पड़ोसी देश चीन की तुलना में बेहतर आकार ले रही है. यह बात देश के वैक्सीन टास्क फोर्स के प्रमुख एनके अरोड़ा ने एक इंटरव्यू में कही.
भारत के नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप (NTAGI) के कोविड-19 कार्यकारी समूह के अध्यक्ष एनके अरोड़ा ने यह भी बताया कि चीन के टीकाकरण की स्थिति, कोरोना केसों की गंभीरता और वहां फैलने वाले वैरिएंट्स की जानकारी में भारी गड़बड़ियां हैं.
कोरोना के खिलाफ फिर से सक्रिय होना होगा महामारी की शुरुआत से टीकाकरण अभियान की योजनाओं के साथ निकटता से जुड़े एनके अरोड़ा ने कहा, ''चीन की स्थिति ने हमें फिर से उच्च स्तर पर सावधानी बरतने और कोरोना के खिलाफ सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया है. हमें किसी भी हालत में एक पल के लिए भी लड़खड़ाना नहीं है.''
भारत में हाइब्रिड इम्युनिटी फैल चुकी है
उन्होंने कहा कि भारत कई वजहों से चीन की तुलना में महामारी से लड़ने के मामले में बेहतर स्थिति में है. उनमें एक वजह हाइब्रिड इम्युनिटी है जो टीकाकरण और नैचुरल इम्युनिटी (बीमारी के बाद पैदा होने वाली इम्युनिटी) का मिश्रण है.

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