
'भारत के फैसलों से सहमत नहीं', कनाडा के डिप्लोमैट्स को निकालने पर अमेरिका के बाद ब्रिटेन का भी आया बयान
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India-Canada row: ब्रिटेन सरकार ने मोदी सरकार के उन फैसलों पर नाराजगी जताई है, जिस वजह से कनाडा के 41 राजनयिकों को भारत छोड़ना पड़ा है. इसी महीने 3 अक्टूबर को भारत सरकार की ओर से कनाडा को चेतावनी दी गई थी कि अगर राजनयिकों की संख्या कम नहीं की जाती है तो उनकी सभी राजनयिक छूट खत्म कर दी जाएगी.
India-Canada standoff: मोदी सरकार द्वारा 41 कनाडाई राजनयिकों को वापस भेजने के कदम पर अमेरिका के बाद ब्रिटेन ने भी नाराजगी जाहिर की है. ब्रिटेन सरकार ने बयान जारी करते हुए कहा है कि भारत के इस कदम से राजनयिक संबंधों के लिए बने वियना कन्वेंशन के प्रभावी कामकाज पर असर पड़ा है. हम उम्मीद करते हैं कि सभी देश राजनयिक संबंधों के लिए 1961 में बने वियना कन्वेंशन के तहत अपने दायित्वों का पालन करेंगे.
इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा था कि हम उम्मीद करते हैं कि भारत राजनयिक संबंधों के लिए 1961 में बने वियना कन्वेंशन के तहत अपने दायित्वों का पालन करेगा. मिलर ने कहा था कि कनाडाई राजनयिकों के भारत से वापस जाने से हम चिंतित हैं. किसी भी मतभेद को सुलझाने के लिए राजनयिकों की जरूरत होती है.
दरअसल, भारत और कनाडा में जारी राजनयिक विवाद के बीच कनाडा ने गुरुवार को भारत से अपने 41 डिप्लोमैट्स को वापस बुला लिया है.
भारत के आंतरिक मामलों में कनाडाई राजनयिकों के हस्तक्षेप और संख्या की अधिकता का हवाला देते हुए मोदी सरकार ने ट्रूडो सरकार को 41 डिप्लोमैट्स को वापस बुलाने का अल्टीमेटम दिया था. तीन अक्टूबर को भारत सरकार की ओर से कनाडा को चेतावनी दी गई थी कि अगर राजनयिकों की संख्या कम नहीं की जाती है तो उनकी सभी राजनयिक छूट खत्म कर दी जाएगी.
भारत के फैसलों से सहमत नहींः ब्रिटेन
शुक्रवार को ब्रिटिश विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) की ओर से जारी बयान में कहा गया है, " किसी भी प्रकार के मतभेदों को सुलझाने के लिए बात-चीत और राजनयिकों की जरूरत होती है. हम भारत सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से सहमत नहीं हैं. भारत के इस निर्णय से कई कनाडाई राजनयिकों को भारत छोड़ना पड़ा है."

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