
भारत के पानी रोकने से परेशान PAK को बचाने आया चीन, इस प्रोजेक्ट में ला रहा तेजी
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सिंधु जल समझौते के निलंबन से पाकिस्तान में पानी की किल्लत हो रही है. इससे निपटने के लिए पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर कई प्रोजेक्ट्स में तेजी ला रहा है. चीन ने खुद कहा है कि वो पाकिस्तान के बांध प्रोजेक्ट्स में तेजी ला रहा है.
भारत ने स्टेट स्पॉन्सर आतंकवाद को देखते हुए पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता रद्द किया जिसके बाद पाकिस्तान में पानी को लेकर भारी अस्थिरता पैदा हो गई है. इस बीच उसके दोस्त चीन ने कहा है कि वो खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बनाए जा रहे एक बांध को जल्द से जल्द पूरा करने जा रहा है. यह बांध स्वात नदी पर मोहमंद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए बनाया जा रहा है.
चीन की सरकारी कंपनी चाइना एनर्जी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन 2019 से खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मोहमंद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. इस प्रोजेक्ट को अगले साल पूरा किया जाना था लेकिन पानी की कमी को देखते हुए पाकिस्तान आनन-फानन में चीन के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट का काम आगे बढ़ा रहा है.
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मोहमंद बांध को बिजली उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जल आपूर्ति के लिए किया जाएगा.
शनिवार को चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी ने बताया कि बांध पर कंक्रीट भरने का काम शुरू हो गया है. सीसीटीवी ने कहा, 'यह पाकिस्तान के प्रमुख नेशनल प्रोजेक्ट्स के लिए बांध का निर्माण मील का पत्थर साबित होगा जो काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है.'
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले को देखते हुए भारत ने पाकिस्तान के साथ 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता रद्द कर दिया था. इस समझौते के तहत पाकिस्तान को सिंधु और उसकी सहायक नदियों झेलम और चेनाब का पानी दिया जाता है. समझौते में भारत को पूर्वी रावी, सतलज और व्यास नदियों के पानी पर अधिकार मिला. झेलम और चेनाब दोनों ही नदियां भारत से होते हुए पाकिस्तान पहुंचती हैं और समझौते के निलंबन से पाकिस्तान में पानी की किल्लत हो गई है.
सिंधु जल समझौते के रद्द होने से पाकिस्तान परेशान हो गया है और उसने कहा है कि पानी उसका अहम राष्ट्रीय हित है जो उसे 24 करोड़ लोगों की लाइफलाइन है.

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