
भारत की नागरिकता मिलने के बाद क्या चुनाव लड़ेंगे अक्षय कुमार? खुद दिया था ये जवाब
AajTak
अक्षय कुमार के ससुर राजेश खन्ना कांग्रेसी थे. राजेश खन्ना ने 1991 में नई दिल्ली से बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में उन्हें लालकृष्ण आडवाणी ने मात दी थी. हालांकि, इसी सीट पर हुए उपचुनाव में राजेश खन्ना ने शत्रुघ्न सिन्हा को हरा दिया था.
अभिनेता अक्षय कुमार को भारत की नागरिकता मिल गई है. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अक्षय ने ट्वीट कर यह जानकारी दी. उन्होंने लिखा, दिल और सिटीजनशिप दोनों हिंदुस्तानी. हैप्पी इंडिपेंडेंस डे. जय हिंद. अक्षय को भारत की नागरिकता मिलने के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या वे राजनीति में आएंगे या फिर 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ेंगे? अक्षय ने कुछ समय पहले ही हमारे सहयोगी द लल्लनटॉप से बातचीत में राजनीति में आने से जुड़े सवाल पर जवाब दिया था.
अक्षय से जब पीएम मोदी से नजदीकी और राजनीति में आने को लेकर सवाल किया गया, तो अक्षय ने जवाब में कहा था, मुझे राजनीति में आने का कोई शौक नहीं है. मैं ऐसी फिल्में करना चाहता हूं. देश के लिए जैसा नागरिक कर सकता है, मैं वैसा करता हूं. मुझे कोई भी जगह ऐसी नजर आती है, जहां मैं कुछ कर सकता हूं. मैं खुद वहां नहीं जा सकता, पैसे भेजकर जो भी मुझसे होता है, कर देता हूं. लेकिन मुझे राजनीति में नहीं जाना. मैं फिल्में बनाकर खुश हूं.
अक्षय के पास थी कनाडा की नागरिकता
अक्षय के पास कनाडा की नागरिकता थी. इसे लेकर उनपर निशाना भी साधा जाता रहा है. सोशल मीडिया पर भी अक्षय इसे लेकर कई बार ट्रोल हो चुके हैं. अक्षय ने पिछले आज तक को दिए इंटरव्यू में कहा था, मुझे खराब लगता है, जब लोग मेरी नागरिकता पर सवाल खड़े करते हैं. वह किसी भी बारे में कुछ नहीं जानते. बस बातें बनाते हैं. सबसे ज्यादा मुझे यह खराब लगता है जब लोग मुझे कैनेडियन कुमार कहकर बुलाते हैं. अक्षय ने कहा था, भारत मेरे लिए सबकुछ है. मैंने जो भी कमाया है, यहां रहकर कमाया है. और मैं खुद को खुशनसीब मानता हूं कि मुझे लौटाने का मौका मिला है. उन्होंने बताया था कि उन्होंने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया है.
कैसे मिली थी कनाडा की नागरिकता?

ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अहम चेहरा अली लारीजानी को इजरायल ने टारगेट किया है. हालांकि ये अब तक साफ नहीं है कि अली लारीजानी की स्थिति कैसी है. इजराइल का एक और बड़ा दावा है कि उसके हमले की जद में बसीज कमांडर भी आए हैं. दावे के मुताबिक बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर गुलामरेज़ा सुलेमानी को भी निशाना बनाया गया. बसीज, ईरान की एक अहम पैरामिलिट्री फोर्स है, जो आंतरिक सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभाती है.

एक तरफ अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे है. वहीं दूसरी तरफ हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल की जंग जारी है. इजरायल ने एक बार फिर लेबनान में हमला किया. लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायली एयर फोर्स ने एयर स्ट्राइक की. हिज्बुल्लाह के ठिकानों को इजरायल ने निशाना बनाया, हमले के बाद बेरूत के कई इलाकों में धमाके की आवाज सुनी गई. हमले के बाद काला धुआं भी उठता देखा गया.

होर्मुज में तेल और गैस पर ईरान ने जो रोक लगा रखी है, उसकी सुरक्षा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मित्र देशों से युद्धपोत भेजने की गुहार लगाई है. लेकिन फ्रांस, जापान, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया, यगां तक की यूके ने भी कहां वो अभी इसपर विचार विमर्श कर रहे है.

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक से सारे शहर में सन्नाटा पसरा है. जिस अस्पताल में कभी हजार से ज्यादा मरीज थे वो इमारत अब खंडहर में तब्दीर हो गई है. चारों ओर सिर्फ आग और धुंए का गुबार दिख रहा है. इस हमले से 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 250 से ज्यादा लोग घायल हो चुके है.









