
भारत की आपत्ति के बावजूद मालदीव ने चीनी जहाज को दी एंट्री, अब चीन ने कही ये बात
AajTak
चीन का एक रिसर्च जहाज इसी हफ्ते मालदीव पहुंचने वाला है. इस जहाज को लेकर मालदीव की मोहम्मद मुइज्जू सरकार ने कहा था कि जहाज उसके समुद्री क्षेत्र में किसी तरह का रिसर्च नहीं करेगा लेकिन अब चीन ने इससे उलट बात कही है.
चीन ने कहा है कि मालदीव में उनका जहाज वैज्ञानिक शोध के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. चीन का शोध जहाज Xiang Yang Hong 03 इस हफ्ते मालदीव पहुंचने वाला है जिसे लेकर भारत, चीन और मालदीव में तनाव बढ़ गया है. इसी बीच चीनी विदेश मंत्रालय ने मालदीव के लिए निकले अपने रिसर्च जहाज को लेकर अहम बयान दिया है. यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि मालदीव की मोहम्मद मुइज्जू सरकार ने कुछ समय पहले कहा था कि चीनी जहाज उनके समुद्री क्षेत्र में रुककर किसी तरह के रिसर्च का काम नहीं करेगा.
सोमवार को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, 'समुद्री क्षेत्रों में चीन के वैज्ञानिक शोध कार्य केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं जिसका लक्ष्य समुद्र को लेकर मानवजाति की वैज्ञानिक समझ को बढ़ाना है. ये काम समुद्री कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रावधानों का पालन करते हुए किया जा रहा है. सालों से चीन और मालदीव समुद्री वैज्ञानिक शोध में सहयोग करते आ रहे हैं.'
चीनी प्रवक्ता ने आगे कहा कि चीन इस बात की सराहना करता है कि मालदीव ने अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रासंगिक प्रावधानों, संप्रभुता और चीन-मालदीव मित्रता के आधार पर चीनी वैज्ञानिक रिसर्च जहाज को अपने बंदरगाहों में प्रवेश करने के लिए सुविधा और सहायता मुहैया की है.
चीनी जहाज को लेकर मुइज्जू सरकार ने क्या कहा?
चीन Xian Yang Hong 03 को सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करता है और हिंद महासागर में इसके जरिए जासूसी का काम करता है. इसी वजह से भारत चीनी जहाज को भारत के पड़ोसी देशों में लंबे समय तक रुककर कथित वैज्ञानिक शोध करने पर आपत्ति जताता रहा है.
चीन का यह जहाज पहले श्रीलंका में रुकने वाला था लेकिन श्रीलंका ने विदेशी जहाजों के अपने बंदरगाहों पर रुकने को लेकर एक साल की रोक लगा दी जिसके बाद चीन ने मालदीव का सहारा लिया है.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








