
भारत और रूस के साथ त्रिपक्षीय सहयोग क्यों चाहता है चीन? RIC फॉर्मेट की बहाली का किया सपोर्ट
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लद्दाख गतिरोध के कारण भारत-चीन संबंधों में चार साल से ज़्यादा समय तक ठहराव रहा. पिछले साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कज़ान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात के बाद द्विपक्षीय संबंधों में फिर से जान आई है. तब से दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए लगातार वार्ता चल रही है.
चीन ने गुरुवार को ठंडे बस्ते में पड़ चुके रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय सहयोग को फिर से शुरू करने की वकालत की है. पहले रूस की तरफ से यह पहल की गई थी, जिसका बीजिंग ने समर्थन किया है. चीन ने कहा कि रूस, भारत और चीन का त्रिपक्षीय सहयोग न सिर्फ तीनों देशों के हित में है, बल्कि क्षेत्र और विश्व की सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी काफी अहम है.
रूस की पहल का किया समर्थन
रूसी समाचार पोर्टल इज़वेस्टिया ने गुरुवार को रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको के हवाले से कहा कि मास्को RIC फॉर्मेट की बहाली की उम्मीद करता है और इस मुद्दे पर बीजिंग और नई दिल्ली के साथ बातचीत कर रहा है. रुडेन्को ने कहा, 'यह मुद्दा दोनों के साथ हमारी बातचीत का हिस्सा है. हम इस फॉर्मेट को सफल बनाने में रुचि रखते हैं, क्योंकि ब्रिक्स के संस्थापकों के अलावा ये तीनों देश अहम साझेदार भी हैं.'
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रूस के उप विदेश मंत्री ने कहा, 'मेरी राय में इस फॉर्मेट की कमी सही नहीं लगती. इस बारे में हम उम्मीद करते हैं कि देश RIC के ढांचे के भीतर काम फिर से शुरू करने पर सहमत होंगे. बेशक, जब इन राज्यों के बीच संबंध उस स्तर पर पहुंच जाएंगे जो उन्हें त्रिपक्षीय फॉर्मेट में काम करने की इजाजत देता है.'
विश्व शांति और प्रगति के लिए जरूरी

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