
भारत आ रहे कनाडाई PM, नहीं जाएंगे पंजाब... ट्रुडो की गलतियों से कार्नी ने लिया सबक?
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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में रणनीतिक रीसेट माना जा रहा है. व्यापार, यूरेनियम समझौता और सुरक्षा सहयोग पर फोकस के साथ यह दौरा पिछले तनाव को पीछे छोड़ नए आर्थिक और कूटनीतिक अध्याय की शुरुआत का संकेत है.
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा सिर्फ एक राजनयिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच पिछले तीन वर्षों से जमी बर्फ को पिघलाने की एक अहम कोशिश है. भारत और कनाडा के संबंधों में हाल के वर्षों में आई कड़वाहट को देखते हुए इस यात्रा को एक स्ट्रेटेजिक रीसेट यानी ‘रणनीतिक सुधार’ के रूप में देखा जा रहा है.
प्रधानमंत्री कार्नी की यह यात्रा मुंबई से शुरू होकर नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्च स्तरीय वार्ता पर समाप्त होगी. लेकिन इस दौरे का सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि कार्नी दशकों में ऐसे पहले प्रधानमंत्री होंगे जो पंजाब दौरे पर नहीं जाएंगे. इससे संकेत मिलता है कि कनाडा अब अपनी विदेश नीति को घरेलू वोट बैंक की राजनीति से अलग कर भारत से संबंध मजबूत करने की दिशा में ले जा रहा है.
भारत-कनाडा संबंधों का इतिहास और ट्रूडो युग की कड़वाहट
भारत और कनाडा के संबंध ऐतिहासिक रूप से लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत व्यापारिक हितों पर आधारित रहे हैं. लेकिन 2023 के बाद संबंधों में आई गिरावट ने दोनों देशों को एक अभूतपूर्व कूटनीतिक संकट में डाल दिया. पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में खालिस्तानी अलगाववाद का मुद्दा संबंधों में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा.
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सितंबर 2023 में ट्रूडो द्वारा कनाडाई संसद में भारत पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप लगाने के बाद संबंध काफी बिगड़ गए थे. भारत ने इन आरोपों को हमेशा 'बेतुका' और राजनीति से 'प्रेरित' बताते हुए खारिज किया और कनाडा पर अपनी धरती पर चरमपंथी तत्वों को पनाह देने का आरोप लगाया.

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