
भाभी से गैंगरेप, ननद से ब्लैकमेलिंग और पुलिस का खेल... दिल झकझोर देगी रेप पीड़िता की आपबीती
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राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ के राजियासर थाना इलाके के गांव सांवलसर की कहानी रूह को कंपा देना वाली है. यहां गैंगरेप के बाद ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर एक भाभी और ननद ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली. करीब तीन महीने पहले भाभी ने तो चार दिन पहले नंनद ने खुदकुशी कर ली.
साल 2017 में एक फिल्म आई थी 'काबिल'. इस फिल्म के हीरो और हिरोईन यानी ऋतिक रोशन और यामी गौतम का किरदार नेत्रहीन था. फिल्म में एक कॉर्पोरेटर का बेटा यामी के किरदार का रेप करता है. ऋतिक और यामी थाने जाकर रिपोर्ट लिखाते हैं. लेकिन पुलिस कुछ नहीं करती. इसके बाद हौसला बढ़ता है तो कॉर्पोरेटर का बेटा दोबारा यामी के घर में घुस कर उसका रेप करता है. अब कानून और सिस्टम से हार चुकी यामी की किरदार खुदकुशी कर लेती है.
फिल्म की ये कहानी दिल झकझोर देने वाली है. लेकिन राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ के राजियासर थाना इलाके के गांव सांवलसर की कहानी रूह को कंपा देना वाली है. यहां गैंगरेप के बाद ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर एक भाभी और ननद ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली. करीब तीन महीने पहले भाभी ने आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जबकि चार दिन पहले मजबूर नंनद ने फांसी का फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली है. आरोप गांव के तीन लड़कों पर लगा है.
मृतिका के भाई ने बताया कि गांव के तीन युवक पिछले कुछ समय से उसकी पत्नी को परेशान कर रहे थे. उन्होंने उसकी पत्नी का अश्लील वीडियो बना लिया था, जिसे वायरल करने की धमकी देकर लगातार उसके साथ गैंगरेप कर रहे थे. इसके बाद उन्होंने पत्नी से उसकी ननद से भी बात करवाने के लिए कहा था. मजबूर होकर उसने ननद से बात करा दी. उन लोगों ने उसे भी भाभी की इज्जत का वास्ता देकर अपने पास बुलाया और अपनी हवस का शिकार बनाया.
इस तरह तीनों युवक उन दोनों महिलाओं का लगातार शारीरिक शोषण करने लगे. इससे तंग आकर भाभी ने एक दिन खुद को आग लगा लिया. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. कुछ दिनों बाद ही उसकी मौत हो गई. ये दिसंबर 2023 की बात है. इस मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई से बचती रही. इधर आरोपियों का मन इतना बढ़ गया कि भाभी की मौत के बाद भी ननद को परेशान करते रहे.
इससे दुखी होकर ननद ने अपने परिजनों को सारी बात बता दी. परिवार के लोग थाने पहुंचे. पीड़ित लड़की का बयान दर्ज किया जाने लगा. इस दौरान पुलिस अधिकारी पीड़िता के साथ ऐसे सलूक कर रहे थे, जैसे कि वो खुद आरोपी हो. डीएसपी ऐसे ऐसे सवाल पूछ रहे थेजिसे सुन कर पीड़िता को को लग रहा था जैसे एक बार फिर उसका बलात्कार हो रहा है. पुलिसिया व्यवहार से तंग आकर पीड़िता के परिजन गंगानगर एसपी गौरव यादव के पास पहुंचे.
एसपी को पूरे मामले से अवगत कराया. उनके आदेश के बाद इस मामले की जांच शुरू की गई. लेकिन अंधे कानून के अंधेपन का तमाशा खत्म नहीं होता है. लड़की के साथ गैंगरेप हुआ था. जाहिर है मेडिकल रिपोर्ट से उसकी सच्चाई सामने आ जाती. लेकिन कानून को अपने हिसाब से नचाने वाले डिप्टी एसपी और उनके बहादुर पुलिस वालों की बेशर्मी देखिए कि मेडिकल टेस्ट के लिए आभा को उसके गांव से श्रीगंगानगर अकेले उस दिन अस्पताल भेजते हैं, जिस दिन अस्पताल में छुट्टी थी. कोई डॉक्टर तक नहीं था. पूरा दिन खराब करके पीड़िता वापस लौट आई. अगले दिन फिर पीड़िता शहर के अस्पताल पहुंची.

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