
बेकाबू भीड़, संकरी सीढ़ियां और आने-जाने का एक ही रास्ता... मनसा देवी मंदिर में 6 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन?
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सावन के महीने में हर की पैड़ी से लेकर चंडी देवी और मनसा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. संभावना ये भी होती है कि अगर रविवार या शनिवार है तो छुट्टी के मद्देनज़र श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ सकती है. ऐसे में मंदिर कमेटी, वन विभाग और पुलिस ने समय रहते भीड़ का अंदाज़ा क्यों नहीं लगाया?
हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में रविवार को हुई भगदड़ में 6 लोगों की मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक मंदिर की सीढ़ियों पर दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं के बीच शॉर्ट सर्किट की अफवाह उड़ी और भीड़ बेकाबू होती चली गई. इस भगदड़ में 25 लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. लेकिन सवाल यह है कि इस भगदड़ के लिए जिम्मेदार कौन है?
मंदिर जाने के लिए रोप-वे और पैदल मार्ग
पूरे घटनाक्रम की बात करें तो हादसे सुबह के करीब 9 बजे हुआ. पवित्र सावन महीने में रोज की तरह श्रद्धालु हरि की पैड़ी पर स्नान- ध्यान करके आगे मनसा देवी मंदिर में दर्शन के लिए शिवालिक की पहाड़ियों की ओर बढ़ रहे थे. मनसा देवी मंदिर जाने के लिए शिवालिक की पहाड़ियों में रोप-वे की व्यवस्था भी है और इसके अलावा पैदल मार्ग भी बनाया हुआ है.
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पैदल यात्रियों के लिए शिवालिक पहाड़ियों में मार्ग है लेकिन इस मार्ग से मंदिर प्रांगण में ऊपर जाने के लिए सीढ़ियों से होकर गुज़रना पड़ता है. हज़ारों की तादाद में श्रद्धालु सीढ़ियों के ज़रिए मनसा देवी मंदिर की ओर आगे बढ़ रहे थे. इन सीढ़ियों की चौड़ाई 12 फीट से सोलह फीट तक है और आगे जाकर रास्ता संकरा होता चला जाता है. पीछे से भीड़ लगातार आ रही थी और मंदिर प्रांगण के नज़दीक आते-आते रास्ता संकरा होता चला गया.
बेकाबू भीड़ से मची भगदड़

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