
बिना सूरज के 3000 घंटे! कैसे बीतती है उस द्वीप पर जिंदगी, जहां इंसानों से ज्यादा भालू हैं!
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ये वो जगह है जहां सूरज लगातार 120 दिन छुट्टी पर रहता है. रात नवंबर में शुरू होती है तो फरवरी तक चलती है. इस दौरान यहां रह रहे लोगों को नाइट लाइफ ही एंजॉय करना होता है. यहां सुबह के 10 बजे हों या रात के 2, आसमान हमेशा तारों और जादुई नॉर्दर्न लाइट्स से भरा रहता है. लोग घने अंधेरे में राइफल लेकर चलते हैं. आखिर कड़ाके की ठंड और 4 महीने की काली रात के बीच ये लोग कैसे रहते हैं?
सोचिए, आप सुबह 8 बजे दफ्तर के लिए निकलते हैं और बाहर आधी रात जैसा घना अंधेरा हो. आप लंच ब्रेक में बाहर आते हैं, तब भी आसमान में तारे चमक रहे हैं और शाम को घर लौटते वक्त भी वही सन्नाटा. हम और आप अक्सर एक बादल छाने या एक दिन की बारिश में उदास हो जाते हैं, लेकिन नॉर्वे के 'लॉन्गइयरबायेन' में करीब 2,500 लोग हर साल लगातार 4 महीने यानी नवंबर से फरवरी तक इसी घने अंधेरे में बिताते हैं.
विज्ञान की भाषा में इसे 'पोलर नाइट' कहते हैं. जहां सूरज पर्दे के पीछे ही रहता है और दुनिया पूरी तरह कृत्रिम रोशनी पर निर्भर हो जाती है. हमारी डेली रूटीन जहां सूरज की पहली किरण से तय होती है, वहीं यहां के लोगों की घड़ी केवल नंबरों का खेल है. बाकी दुनिया में सूरज का उगना ताजगी लाता है, लेकिन यहां की सुबह और रात में कोई फर्क नहीं होता. यहां के लोग 'विटामिन-डी' की गोलियां और विशेष 'लाइट थेरेपी' वाले लैंप्स का सहारा लेते हैं ताकि शरीर को यह भ्रम रहे कि दिन हुआ है.
हमारे यहां 'संडे' का मतलब पिकनिक होता है, लेकिन यहां संडे का मतलब है बर्फ के तूफान के बीच अपने घर के भीतर खुद को व्यस्त रखना. इतने लंबे अंधेरे में रहने वाले लोगों को चिड़चिड़ाहट और डिप्रेशन का खतरा बहुत बढ़ जाता है. इससे लड़ने के लिए यहां के लोग एक खास फिलॉसफी अपनाते हैं, जिसे वे 'कोसेलिग' कहते हैं.
यह हमारी 'सुकून' की भावना जैसा है. लोग अपने घरों को अनगिनत मोमबत्तियों, गर्म कॉफी और ऊनी कंबलों से सजाते हैं. अंधेरे को कोसने के बजाय यहां के लोग उसे 'फेस्टिवल' की तरह मनाते हैं. हर शाम किसी न किसी के घर पर संगीत, बोर्ड गेम्स या कहानियों की महफिल सजती है.
'स्नोमोबाइल' में सवार होकर देखते हैं नॉर्दर्न लाइट्स
यहां अकेलापन दूर करने का सबसे बड़ा तरीका कम्युनिटी डिनर यानी सामूहिक भोज है. इस द्वीप पर करीब 50 अलग-अलग देशों के लोग रहते हैं, जो मुख्य रूप से रिसर्च या माइनिंग के लिए आए हैं. इतनी विविधता के बावजूद यहां का आपसी जुड़ाव कमाल का है. अंधेरे के महीनों में यहां की सोशल लाइफ बाकी दुनिया से ज्यादा एक्टिव हो जाती है. लोग 'स्नोमोबाइल' पर सवार होकर मीलों दूर नीली बर्फ की वादियों में 'नॉर्दर्न लाइट्स' देखने निकलते हैं. हमारे लिए जो अजूबा है, वह उनके लिए रात की सैर है. यहां के लोग 'पोलर जैज' जैसे म्यूजिक फेस्टिवल्स का आयोजन करते हैं ताकि शहर का सन्नाटा संगीत से भरा रहे.

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