
'बाइडेन विमान में सो रहे थे, परिवार सैनिकों के शवों का घंटों इंतजार करता रहा...', रिपोर्ट में दावा
AajTak
ब्रिटिश अखबार डेलीमेल से बात करते हुए जान गंवाने वाले एक सैनिक की बहन रोइस मैककॉलम ने कहा, 'बाइडेन ने हमें अपने मृत परिवार के सदस्यों के शव लेने के लिए तीन घंटे से ज्यादा इंतजार करवाया.'
अफगानिस्तान में मारे गए अमेरिकी नौसैनिकों के कई परिवार के सदस्यों को तीन घंटे से ज्यादा इंतज़ार करना पड़ा, क्योंकि राष्ट्रपति जो बाइडेन 2021 में सेवा सदस्यों के शवों को लेने के लिए अमेरिकी सेना द्वारा आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम से पहले अपने एयर फ़ोर्स वन विमान में सो गए थे. एक रिपोर्ट में इसका दावा किया गया है.
दरअसल, राष्ट्रपति और प्रथम महिला जिल बाइडेन को डेलावेयर के डोवर एयर फ़ोर्स बेस पर 'सम्मानजनक ट्रांसफर सेरमनी' में मारे गए सैनिकों के ताबूतों का स्वागत करना था. 26 अगस्त, 2021 को तालिबान आतंकवादियों ने काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के एबे गेट पर कई आत्मघाती बम विस्फोटों में 13 अमेरिकी सैनिकों को मार डाला था. इस हमले में कई अफगानी भी मारे गए.
तीन घंटे से ज्यादा इंतजार करवाया ब्रिटिश अखबार डेलीमेल से बात करते हुए जान गंवाने वाले एक सैनिक की बहन रोइस मैककॉलम ने कहा, 'बाइडेन ने हमें अपने मृत परिवार के सदस्यों के शव लेने के लिए तीन घंटे से ज्यादा इंतजार करवाया.' बहन ने कहा कि शोक में रहे परिवार राष्ट्रपति के आने का इंतजार कर रहे थे और एक सैन्य अधिकारी ने उन्हें बताया कि वह अपने विमान में झपकी ले रहे थे.
एक अन्य सैनिक टेलर हूवर के पिता डेरिन हूवर ने भी यही बात दोहराई. उन्होंने कहा, 'हम उस ऑफिस में बाइडेन के इंतजार में लंबे समय तक बैठे रहे.' हालांकि, व्हाइट हाउस ने परिवारों के दावों का खंडन करते हुए कहा कि ऐसी कोई घटना कभी नहीं हुई.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने डेली मेल को बताया, 'यह दावा असत्य है. जैसा कि राष्ट्रपति बाइडेन ने एबी गेट पर हुए दुखद हमले की चौथी वर्षगांठ पर और डोवर में परिवार के सदस्यों से मिलने के बाद उन्हें लिखे पत्रों में कहा था, 'ये 13 अमेरिकी और कई अन्य जो घायल हुए सर्वोच्च अर्थों में देशभक्त थे' और 'हम उनके और उनके परिवारों के कर्जदार हैं, जिसे हम कभी भी पूरी तरह से चुका नहीं पाएंगे, लेकिन इसे पूरा करने के लिए काम करना कभी बंद नहीं करेंगे.'

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान ने उन पर हमला किया या उनकी हत्या की साज़िश रची, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह से दुनिया के नक्शे से मिटा देगा. यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ऐसे हालात में दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.






