
बाइडेन-जिनपिंग की मीटिंग के बाद फिर शुरू होगा US-चीन मिलिट्री डायलॉग, जानें भारत पर इसका क्या होगा असर
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बाइडेन और जिनपिंग की हालिया बातचीत को दोनों देशों के संबंधों पर जमी बर्फ की परत को पिघलाने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है. इस चर्चा का फोकस क्लाइमेट चेंज जैसी वैश्विक चुनौतियों पर रहा लेकिन साथ ही दोनों देशों ने कई अन्य चुनौतियों पर भी सहयोग की इच्छा जताने के संकेत दिए.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हाल ही में हुई बैठक से वैश्विक समीकरणों में बदलाव देखने को मिला है. दो वैश्विक महाशक्तियों के प्रमुखों के बीच की यह बैठक सिर्फ द्विपक्षीय मामला नहीं है बल्कि कहा जा रहा है कि इसका भारत पर भी प्रभाव पड़ सकता है, विशेष रूप से चीन के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद की वजह से.
बाइडेन और जिनपिंग की हालिया बातचीत को दोनों देशों के संबंधों पर जमी बर्फ की परत को पिघलाने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है. इस चर्चा का फोकस क्लाइमेट चेंज जैसी वैश्विक चुनौतियों पर रहा लेकिन साथ ही दोनों देशों ने कई अन्य चुनौतियों पर भी सहयोग की इच्छा जताने के संकेत दिए. इन नए घटनाक्रमों से दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और सामूहिक प्रयासों को बढ़ाने के नए युग की शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है.
इस बैठक को चीन के लिए बहुत बड़े कूटनीतिक लाभ के तौर पर देखा जा रहा है. चीन ने विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और आर्थिक विकास दर बढ़ाने पर है.
इस बैठक से चीन को कूटनीतिक लाभ हुआ है. चीन दरअसल आर्थिक विकास को बढ़ाने और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अमेरिका के साथ तनाव को कम करना चाहता था. ऐसे में अमेरिका और चीन के बीच की इस सैन्य वार्ता की बहाली को एक जीत के तौर पर देखा जा सकता है. पिछले साल अमेरिका की प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे की वजह से दोनों देशों के बीच सैन्य वार्ता बाधित हो गई थी.
भारत की रणनीतिक स्थिति
वैश्विक स्तर पर हो रहे इन बदलावों के बीच भारत बेहद जटिल स्थिति में है. 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से चीन के साथ सीमा पर तनाव बना हुआ है. ऐसे में अमेरिका और चीन के संबंधों के बदलते समीकरणों की वजह से चीन को लेकर भारत की अप्रोच प्रभावित हो सकती है.

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