
'बांग्लादेश में सिर्फ अपना वजूद चाहते हैं कट्टरपंथी...', हिंदुओं पर हमले को लेकर क्या बोले शेख हसीना सरकार में मंत्री अराफात
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बांग्लादेश में लगातार अल्पसंख्यकों पर हमले की घटनाएं सामनेआ रही है. 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. उसके बाद बांग्लादेश में 25 दिसंबर को अमृत मंडल की भीड़ ने लिंचिंग कर दी थी.
बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों पर लगातार हमलों की खबर सुर्खियों में बनी हुई है. देश में अराजकता का माहौल है. इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार में संचार मंत्री रहे मोहम्मद अली अराफात ने अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर बयान दिया है.
शेख हसीना की सरकार में संचार मंत्री रह चुके मोहम्मद अली अराफात ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों पर हमले हमने पहले भी देखे हैं. इस्लामिक कट्टरपंथी समूहों ने न सिर्फ हिंदुओं पर हमले किए बल्कि उनके घरों, बिजनेस और प्रतिष्ठानों पर भी हमले किए.
उन्होंने कहा कि इन कट्टरपंथियों का अल्पसंख्यकों के प्रति एक खास तरह का रवैया है. ये लोग ऐसा समाज नहीं चाहते, जहां सब मिल-जुलकर रहें. ये अन्य सभी समुदायों को खत्म करना चाहते हैं.
अराफात ने कहा कि बांग्लादेश में अभी जो चुनाव होने जा रहे हैं. वह सिर्फ दिखावा है. मौजूदा सरकार सारी शक्तियां बीएनएपी और अन्य को सौंप देगी. इस चुनाव में बाहरी हस्तक्षेप की वास्तव में कोई जरूरत ही नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही धांधली से भरा हुआ है. यूनुस सत्ता में हैं और पाकिस्तानी सैन्य खुफिया एजेंसियों और आईएसआई के हितों की सेवा कर रहे हैं, इसलिए यह चुनाव उसी गिरोह को सत्ता में लौटाएगा, जिसकी अगुवाई बीएनपी और जमात कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि आईएसआई और पाकिस्तानी सैन्य खुफिया तंत्र सक्रिय रूप से बांग्लादेश की राजनीति को आकार दे रहे हैं. वे उन राजनीतिक दलों, संस्थानों, मीडिया और संस्कृति को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं, जो 1971 के मूल्यों और भारत के साथ रचनात्मक रिश्तों का समर्थन करते हैं. वे बांग्लादेश में वही मॉडल दोहराने की कोशिश कर रहे हैं, जो उनके सत्ता प्रतिष्ठान ने पाकिस्तान में लागू किया है.

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