
बांग्लादेश में लोन डिफॉल्टर कारोबारी को मिली सेंट्रल बैंक की कमान, मच गया बवाल!
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मोस्ताकुर रहमान को बांग्लादेश बैंक का गवर्नर बनाए जाने से देश में विवाद छिड़ गया है. जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफीकुर रहमान ने तारिक रहमान सरकार पर हमला बोलते हुए इसे सरकार समर्थित मॉब कल्चर की शुरुआत बताया. मोस्ताकुर की नियुक्ति इसलिए भी सवालों में है क्योंकि वह गारमेंट कारोबारी हैं, बैंकिंग अनुभव नहीं रखते और उनके ऊपर लोन डिफॉल्ट से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं.
मोस्ताकुर रहमान को देश के केंद्रीय बैंक 'बांग्लादेश बैंक' का गवर्नर बनाए जाने के फैसले से बांग्लादेश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख और विपक्षी नेता शफीकुर रहमान ने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोलते हुए इसे 'सरकार समर्थित मॉब कल्चर की औपचारिक शुरुआत' बताया.
वहीं, अंतरिम सरकार के दौरान नियुक्त गवर्नर अहसान हबीब मंसूर के कार्यकाल को अचानक समाप्त कर मोस्ताकुर की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठे हैं. मंसूर ने बुधवार को मीडिया से कहा, 'मैंने न तो इस्तीफा दिया है और न ही मुझे औपचारिक रूप से हटाया गया. मुझे यह खबर मीडिया से पता चली और मैं घर जा रहा हूं.'
अब तक बैंकर्स या अर्थशास्त्रियों को मिलता था पद
मोस्ताकुर की नियुक्ति बांग्लादेश की परंपरा से अलग मानी जा रही है, क्योंकि अब तक यह पद आम तौर पर केंद्रीय बैंकर्स, अर्थशास्त्रियों या वरिष्ठ नौकरशाहों को मिलता रहा है. मोस्ताकुर एक कारोबारी हैं और देश के बड़े गारमेंट सेक्टर से जुड़े हैं, जिनके पास बैंकिंग का अनुभव नहीं है. साथ ही उनके ऊपर लोन डिफॉल्टर का इतिहास होने की बात भी सामने आई है.
कई लोगों के लिए यह नियुक्ति इसलिए भी संवेदनशील बनी क्योंकि यह मंसूर को अचानक हटाने के बाद की गई, जिन्हें एक सम्मानित अर्थशास्त्री माना जाता है और जिन्होंने अवामी लीग सरकार के पतन के बाद के कठिन दौर में देश की मुद्रा और विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर करने में भूमिका निभाई थी. मंसूर को 2028 में पूरा होने वाले कार्यकाल से पहले हटा दिया गया और उन्होंने खुद बताया कि उन्हें इसकी जानकारी आधिकारिक रूप से नहीं बल्कि टीवी समाचारों से मिली.
कौन हैं मोस्ताकुर रहमान?

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