
'बस ये एक गलती मत करना...', ईरान से जंग के बीच चिंता में अमेरिकी जनता, ट्रंप को दी सलाह
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ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच खुद अमेरिका में भी बहस तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई समर्थक हवाई हमलों का समर्थन तो कर रहे हैं, लेकिन जमीनी सैनिक भेजने के खिलाफ हैं. बढ़ती तेल कीमतों और संभावित अमेरिकी हताहतों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, जिससे युद्ध पर ट्रंप की रणनीति सवालों में घिरती दिख रही है.
ईरान से चल रही अमेरिका-इजरायल की जंग को 9 दिन बीत चुके हैं. अमेरिका खुद मान रहा है कि ये संघर्ष कुछ हफ्तों तक खिंच सकता है. इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वोट देने वाले कुछ अमेरिकी नागरिकों ने उनके लिए अपनी सलाह दी है.
दरअसल, ईरान संग लंबी जंग को लेकर अमेरिकी जनता ज्यादा खुश नहीं हैं. ट्रंप ने बमबारी अभियान के लिए कई तरह के स्पष्टीकरण दिए हैं, अनुमान लगाया है कि हमले हफ्तों तक चल सकते हैं, चेतावनी दी है कि संभवतः और ज्यादा अमेरिकी हताहत होंगे. तेल और गैस की बढ़ती कीमतों पर उन्होंने साफ कहा है कि इससे उनको फर्क नहीं पड़ता. इससे कई अमेरिकी चिंतित हैं.
ऐसे में न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने ट्रंप को वोट देने वाले कुछ लोगों से बात की. वे सभी फिलहाल राष्ट्रपति और ईरान युद्ध का समर्थन कर रहे हैं. हालांकि, उनके सबसे कट्टर समर्थकों ने भी चेतावनी दी है कि ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों की बड़ी तैनाती ठीक नहीं होगी.
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद रॉयटर्स ने उन आठ अमेरिकियों से बात की है जिन्होंने 2024 में ट्रंप को वोट दिया था.
आठों ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन के खिलाफ हैं. इनमें से पांच ने कहा कि वे हवाई और समुद्री हमलों का पूरी तरह से सपोर्ट करते हैं, क्योंकि यही ईरान को लंबी दूरी की और परमाणु मिसाइलों का भंडार करने से रोकने का एकमात्र तरीका है. तीन थोड़े कंफ्यूज थे. उनको समझ नहीं आ रहा कि प्रशासन ने संघर्ष क्यों शुरू किया, उनका कहना था कि उन्हें चिंता है कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है और अमेरिकी नागरिकों की जान खतरे में पड़ रही है.
सर्वे में हिस्सा लेने वाले एक शख्स ने कहा, 'हमने जिस हद तक उन पर बमबारी की है, वह ठीक है, लेकिन ट्रंप ने जमीनी स्तर पर सैनिकों की तैनाती और सैनिकों की मौत की बात की है, और मैं इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं कर सकता.'

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.








