
बंगाल पर कांग्रेस का फोकस, अगले साल होने वाले चुनाव को लेकर हुआ मंथन, 200 नेता हुए शामिल
AajTak
2021 के चुनावों में देश की सबसे पुरानी पार्टी ने एक भी सीट नहीं जीती, लेकिन सागरदिघी में एक उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की. हालांकि, उनके एकमात्र विधायक सत्तारूढ़ टीएमसी ब्रिगेड में शामिल हो गए. पार्टी के सूत्रों ने बताया कि अधिकांश नेताओं की राय है कि कांग्रेस को अकेले चुनाव लड़ना चाहिए और इसका मतलब है कि उसे वाम मोर्चे से दूरी बना लेनी चाहिए.
बंगाल कांग्रेस ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के 200 वरिष्ठ नेताओं के साथ एक कार्यशाला आयोजित की. कार्यशाला की अध्यक्षता पार्टी के पर्यवेक्षक गुलाम मीर ने की, जिसमें राज्य प्रमुख शुभंकर सिन्हा और पूर्व सांसद अधीररंजन चौधरी भी शामिल हुए. इसमें मैसेज स्पष्ट था, कांग्रेस 2026 के चुनावों से पहले बूथ स्तर पर अपनी उपस्थिति को मजबूत करना चाहती है. उनका मानना है कि जब तक बूथ और ब्लॉक मजबूत नहीं होंगे, तब तक वे विधानसभा में अपनी संख्या नहीं बढ़ा सकते.
दरअसल, 2021 के चुनावों में देश की सबसे पुरानी पार्टी ने एक भी सीट नहीं जीती, लेकिन सागरदिघी में एक उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की. हालांकि, उनके एकमात्र विधायक सत्तारूढ़ टीएमसी ब्रिगेड में शामिल हो गए. पार्टी के सूत्रों ने बताया कि अधिकांश नेताओं की राय है कि कांग्रेस को अकेले चुनाव लड़ना चाहिए और इसका मतलब है कि उसे वाम मोर्चे से दूरी बना लेनी चाहिए. कांग्रेस पर्यवेक्षक गुलाम मीर ने खुले तौर पर कहा कि कांग्रेस के लिए बंगाल सर्वोच्च प्राथमिकता है.
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य बातचीत करना और सुझाव देना है कि कांग्रेस को कैसे मजबूत किया जाए. हमारे पास 2026 का टारगेट है, हमें आगे बढ़ना है. हमारे सामने दो सत्तारूढ़ दल हैं. बंगाल के लोग चाहते हैं कि राहुल जी आएं. हमने ब्लॉक और बूथ स्तर पर विकास के लिए कड़ी मेहनत करने का प्रस्ताव पारित किया है. 200 से अधिक प्रतिनिधि वहां मौजूद थे. पश्चिम बंगाल हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.”
पार्टी के सूत्रों ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के नेता 2026 के चुनावों से पहले वाम और टीएमसी दोनों से समान दूरी बनाए रखना चाहते हैं. मुख्य एजेंडा बूथों को मजबूत करना था. बंगाल से कांग्रेस के एकमात्र सांसद ईसा खान चौधरी ने कहा, “हमने हर जिले में अपने बूथों को मजबूत करने के सुझाव लिए हैं. हमसे पूछा गया है कि हम किसी के साथ गठबंधन करना चाहते हैं या नहीं."

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का आज 23वां दिन है. अब ये जंग परमाणु प्लांट पर हमलों तक पहुंच गई है. एक दिन पहले इजरायल ने नतांज में ईरान के न्यूक्लियर प्लांट को टारगेट किया, जिसके जवाब में ईरान ने डिमोना और अराद शहरों पर भीषण हमला कर दिया. ईरान के ये हमले युद्ध को और भीषण बना सकते हैं क्योंकि अब इजरायल तेहरान में लगातार कई ठिकानों को निशाना बना रहा है. नेतन्याहू ने इस समय को इजरायल के अस्तित्व और भविष्य की लड़ाई का एक चुनौतीपूर्ण पड़ाव बताया है. वहीं ईरान दावा कर रहा है कि डिमोना और अराद पर हमले के बाद युद्ध का पूरा समीकरण बदल गया है.

आज बात पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दंगल की जहां टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला है. बंगाल की सियासत इस वक्त अपने चरम पर है, जहां हर बयान, हर कदम और हर मंच चुनावी रणनीति का हिस्सा बन चुका है. कल ईद के मौके पर मंदिर -मस्जिद का रंग देखने को मिला. ममता बनर्जी ने कोलकाता में ईद के मौके पर बीजेपी के घुसपैठिए वाले मुद्दे पर अबतक का सबसे बड़ा पलटवार किया. ईद-उल-फितर के मौके पर कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित एक बड़े धार्मिक कार्यक्रम में ममता ने पीएम मोदी को सबसे बड़ा घुसपैठिया बता दिया. ये वही मुद्दा है जिस पर पीएम मोदी लगातार ममता सरकार को घेर रहे हैं. ममता के बयान पर बीजेपी ने हार की हताशा में दिया गया बयान बताया. वहीं बीजेपी ने भी बंगाल में अपने वोटरों को मैसेज दिया है. शुभेंदु अधिकारी कालीघाट मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की और मां काली से आशीर्वाद मांगते हुए कहा कि बंगाल में घुसकर बांग्लादेशी घुसपैठियों ने बहुत अत्याचार किया है. बंगाल में अगले महीने दो चरण में वोटिंग होनी है. ऐसे में जैसे-जैसे तारीख नजदीक आएगी, बयान और भी तीखे होंगे और सियासी चालें और भी पेचीदा. लेकिन सवाल ये कि क्या बंगाल मंदिर-मस्जिद की राजनीति से बाहर निकल पाएगी. इस बार बंगाल में किस पार्टी की नैरेटिव का सिक्का चलेगा. बीजेपी-टीएमसी की आमने-सामने की लड़ाई में आखिर कांग्रेस और कभी 34 साल तक लगातार सरकार में रहने वाली लेफ्ट क्या कर रही है.

दिल्ली में जद (यू) के पूर्व नेता केसी त्यागी ने रविवार को राष्ट्रीय लोक दल जॉइन कर लिया. उन्होंने जयंत चौधरी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली. इससे पहले मंगलवार को उन्होंने बिना कारण बताए जद (यू) से इस्तीफा दिया था. 2003 से पार्टी से जुड़े त्यागी महासचिव, प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं.

पंजाब की मान सरकार की 'एकमुश्त निपटान स्कीम' को व्यापारियों का भारी समर्थन मिला है. पुराने टैक्स बकाये के जरिए अब तक सरकारी खजाने में 111.16 करोड़ रुपये आ चुके हैं. हालांकि, इस राहत का फायदा सिर्फ 31 मार्च तक ही उठाया जा सकता है. इसके बाद सरकार नरम रुख छोड़कर सख्त एक्शन लेगी और करीब 8,000 संपत्तियों पर कुर्की की कार्रवाई शुरू की जाएगी.

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का आज 23वां दिन है. अब ये जंग परमाणु प्लांट पर हमलों तक पहुंच गई है. एक दिन पहले इजरायल ने नतांज में ईरान के न्यूक्लियर प्लांट को टारगेट किया, जिसके जवाब में ईरान ने डिमोना और अराद शहरों पर भीषण हमला कर दिया. ईरान के ये हमले युद्ध को और भीषण बना सकते हैं क्योंकि अब इजरायल तेहरान में लगातार कई ठिकानों को निशाना बना रहा है. नेतन्याहू ने इस समय को इजरायल के अस्तित्व और भविष्य की लड़ाई का एक चुनौतीपूर्ण पड़ाव बताया है. वहीं ईरान दावा कर रहा है कि डिमोना और अराद पर हमले के बाद युद्ध का पूरा समीकरण बदल गया है.

विश्व जल दिवस पर 'जल है तो कल है' जैसे नारे सुनने में तो अच्छे लगते हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत आज भी बहुत कड़वी है. सरकारी कागजों में 'हर घर जल' के बड़े-बड़े दावे तो दिखते हैं, पर असलियत में आज भी लोगों को प्यास बुझाने के लिए दूर-दूर तक पैदल चलना पड़ रहा है. कई परिवारों को तो पानी के लिए खुद कुएं तक खोदने पड़ रहे हैं. जब तक पानी के लिए यह जानलेवा संघर्ष और लंबी कतारें खत्म नहीं होतीं, तब तक ये जल दिवस सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख बनकर ही रह जाएगा.







