
बंगाल की खाड़ी में QUAD देशों की ड्रिल, भारत के साथ आए ये देश, चीन के कान हुए खड़े
AajTak
क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नवंबर 2020 मालाबार ड्रिल के बाद इस समुद्री अभ्यास के लिए हाथ मिलाया है. फ्रांस के साथ, चार राष्ट्रों को इस सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की उम्मीद है. सैन्य विश्लेषक क्वाड देशों के इस ड्रिल को अहम नजरिये से देख रहे हैं.
मालाबार के बाद पहली बार QUAD देश फ्रांस के नेतृत्व में बंगाल की खाड़ी में युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं. भारतीय नौसेना 5 से 7 मार्च तक पूर्वी हिंद महासागर में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के साथ फ्रांसीसी नौसेना अभ्यास में भाग ले रही है. इस युद्धाभ्यास को 18वीं शताब्दी के फ्रांसीसी नौसेना अधिकारी के नाम पर ला पेरॉस नाम दिया गया है. फिलहाल, हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चीन की आक्रमता के बीच इस युद्धाभ्यास को अहम माना जा रहा है. चीन की इस घटनाक्रम पर कड़ी नजर है. (फोटो-इंडिया टुडे) भारतीय नौसेना के जहाज INS सतपुड़ा (एक इंटिग्रल हेलीकॉप्टर के साथ) और पी 8I लॉन्ग रेंज मैरीटाइम पैट्रोल एयरक्राफ्ट के साथ आईएनएस किल्तान पहली बार बहुपक्षीय सामुद्रिक अभ्यास ला पेरॉस में भाग ले रहे हैं. इसमें भारतीय नौसेना के जहाज और विमान फ्रांस की नौसेना (एफएन), रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी (आरएएन), जापान मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स (जेएमएसडीएफ) और अमेरिकी नौसेना (यूएसएन) के जहाज और विमान तीन दिन के समुद्री अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं. (फोटो-PTI)
कोलंबिया में एक विमान क्रैश हो गया, हादसे में मरने वालों की संख्या 66 हो गई है. कोलंबिया वायुसेना का विमान हरक्यूलिस सी-130 विमान रनवे से उड़ान भरते समय क्रैश कर गया. कोलंबियाई वायु सेना के विमान हादसे के बाद तुरंत बचावकर्मी मौके पर पहुंचे और अभियान शुरू किया. जानकारी के मुताबिक विमान में 125 लोग सवार थे.

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.








