
बंगालः 'मेडिकल कॉलेज खोलना चाहते हैं अरिजीत सिंह, हर संभव मदद करेंगे', कॉन्सर्ट रद्द होने के बाद CM ममता का बड़ा ऐलान
AajTak
बॉलीवुड सिंगर अरिजीत सिंह कोलकाता में होने वाला कॉन्सर्ट रद्द हो गया था. इसके बाद भारी विवाद खड़ा हुआ था. हालांकि अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा अऱिजीत ने मुर्शिदाबाद में एक मेडिकल कॉलेज बनाने का प्रस्ताव रखा है, इसके लिए सरकार की ओर से हर संभव मदद की जाएगी.
बॉलीवुड के मशहूर सिंगर अरिजीत सिंह का कोलकाता में होने वाला म्यूजिकल कॉन्सर्ट रद्द होने के बाद शुरू हुए विवाद के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अऱिजीत ने मुर्शिदाबाद में एक मेडिकल कॉलेज बनाने का प्रस्ताव रखा है, इसे तैयार करने में सरकार की ओर से हर संभव मदद की जाएगी.
ममता बनर्जी ने अरिजीत सिंह को "जमीन से जुड़ा इंसान" बताते हए कहा कि सरकार हमेशा नेक कामों में उनकी मदद के लिए तैयार है.
पिछले महीने जी20 बैठक की तैयारियों के बीच सिंगर अरिजीत सिंह का कॉन्सर्ट रद्द कर दिया गया था. दरअसल, बीजेपी ने दावा किया था कि उन्होंने शहर में वार्षिक फिल्म समारोह में 'दिलवाले' फिल्म का 'गेरुआ' गाना गाया था. कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अरिजीत सिंह ने 'रंग दे तू मोहे गेरुआ' गाना गाने का अनुरोध किया था.
वहीं सोमवार को सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि मुर्शिदाबाद की मिट्टी के बेटे अरिजीत एक अद्भुत गायक हैं. उन्होंने हमें गौरवान्वित किया है. अरिजीत सिंह ने जंगीपुर में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की इच्छा व्यक्त की है. ममता ने कहा कि मैं यह कह सकती हूं कि आप (अरिजीत सिंह) इसे बनाते हैं तो मैं हर संभव सहायता प्रदान करूंगी. अरिजीत एक जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं. उन्हें कोई घमंड नहीं है और यह उनकी सबसे बड़ी खूबी है.
हाल ही में रिजीत सिंह के कॉन्सर्ट को लेकर बीजेपी और टीएमसी के बीच नई बहस शुरू हो गई थी. पश्चिम बंगाल युवा बीजेपी नेता इंद्रनील खान ने अरिजीत के शो के लिए टीएमसी गर्वमेंट की निंदा की थी. इंद्रनील खान ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि अरिजीत सिंह का इको पार्क में शो पश्चिम बंगाल सरकार की संस्था HIDCO द्वारा रद्द क्यों किया गया है? KIFF में 'महामहिम' के सामने अरिजीत द्वारा 'रंग दे तू मोहे गेरुआ' गुनगुनाने का रिजल्ट है? आगे उन्होंने कहा कि ये चिंता का विषय है. साथ ही उन्होंने टीएमसी पर असहिष्णुता का आरोप भी लगाया था.
ये भी देखें

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.







