
फ्लोरिडा में अमेरिका और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता पर हुई महत्वपूर्ण मुलाकात, देखें US-टॉप 10
AajTak
अमेरिका और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों की फ्लोरिडा में मुलाकात हुई जिसमें यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की बातचीत अंतिम चरण में है. ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति ने सुरक्षा गारंटी और शांति प्रस्ताव पर चर्चा की. इसी दौरान ट्रंप ने रूस के पुतिन से भी युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए फोन पर बातचीत की. अमेरिका में कई अन्य घटनाएं भी हुईं जैसे न्यू जर्सी में हेलीकॉप्टर दुर्घटना, ग्वाटेमाला में बस हादसा और लॉस एंजलिस में गैस पाइप लाइन फटने की समस्या. भारत-अमेरिका ट्रेड डील भी लगभग तैयार है लेकिन ट्रंप की मंजूरी पर निर्भर है. अमेरिका की संयुक्त राष्ट्र फंडिंग में कटौती जारी है और सख्त इमिग्रेशन नीति के कारण देश में कई क्षेत्रों में कमी दिख रही है.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









