
'पुतिन ट्रंप से मिलने को राजी हुए क्योंकि हमने भारत...', अलास्का मीटिंग को लेकर अमेरिकी सांसद का बड़ा दावा!
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ट्रंप और पुतिन के बीच बीते हफ्ते यूक्रेन मुद्दे पर बैठक हुई जो बेनतीजा रही है. इस बैठक को लेकर ट्रंप की पार्टी के एक सांसद ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका अगर सख्ती दिखा दे तो रूसी तेल के खरीददार अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चुनेंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच 15-16 अगस्त की दरमियानी रात हुई मुलाकात तो बेनतीजा रही लेकिन इस मुलाकात को पुतिन की कूटनीतिक जीत माना जा रहा है. ट्रंप मुलाकात से पहले जहां बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे और पुतिन को किसी समझौते पर पहुंचने की धमकी दे रहे थे, मुलाकात के दौरान वो पुतिन के सामने कमजोर दिखे. ट्रंप प्रशासन रूसी राष्ट्रपति को युद्ध खत्म करने के लिए मनाने पर राजी तो नहीं कर पाया और अब बड़े-बड़े दावे कर रहा है जिसमें अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम भी शामिल हैं.
ग्राहम ने दावा किया कि अगर अमेरिका रूस के ग्राहकों के पीछे पड़ गया तो वो सस्ता रूसी तेल और गैस के बजाए अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चुनेंगे. ग्राहम में ट्रंप के उस दावे को दोहराते हुए कहा कि पुतिन अलास्का इसलिए आए क्योंकि ट्रंप ने रूसी तेल और गैस खरीदने पर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी.
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में दक्षिण कैरोलिना से रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने कहा, 'पुतिन के अलास्का में होने की एकमात्र वजह ये है कि ट्रंप ने रूसी तेल और गैस खरीदने पर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी. पुतिन अलास्का यह देखने तो नहीं आए थे कि अलास्का को बेचने के बाद उसकी स्थिति कैसी है.'
रूस ने 30 मार्च 1876 को 72 लाख डॉलर में अलास्का अमेरिका को बेच दिया था.
इंटरव्यू में लिंडसे ने आगे कहा कि रूस की कमजोरी यह है कि उसकी लगभग सारी आय दूसरे देशों को तेल और गैस की बिक्री से आती है. उन्होंने कहा, 'अगर हम रूस के ग्राहकों (भारत, चीन) से कहें कि उन्हें अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सस्ते रूसी तेल या गैस में से किसी एक को चुनना है, तो वे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चुनेंगे.'
इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि पुतिन बातचीत की टेबल पर इसलिए आए क्योंकि अमेरिका ने भारत के रूसी तेल आयात पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी थी.

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