
पीएम मोदी से ट्रंप की मीठी-मीठी बातों के क्या मायने? कैसे बनेगा भरोसा और क्या है आगे की राह
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भारत और अमेरिका के बीच बीते कुछ महीनों में काफी कुछ बदल चुका है. ट्रंप और उनके करीबी पीटर नवारो की बयानबाजी ने रिश्तों में तनाव को बढ़ाने का काम किया है. क्या ट्रंप और पीएम मोदी के बीच हुई हालिया बातचीत से रिश्तों में जमी बर्फ बिघलने की उम्मीद लगाई जा सकती है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में एक्स पर हुई हंसी-खुशी भरी बातों का मैसेज क्या है? यह एडजस्टमेंट की तरफ इशारा जरूर करता है लेकिन पुराने दौर की वापसी का संकेत नहीं देता. जब माहौल अच्छा था और आत्मविश्वास ऊंचा था. दोनों नेताओं ने साझेदारी को स्थिर करने की दिशा में शुरुआती कदम उठाए हैं और व्यापार वार्ता फिर से शुरू करने का ऐलान किया है.
रास्ता आसान नहीं, लेकिन चलना जरूरी
अमेरिका की ओर से हफ़्तों तक चली तीखी बयानबाज़ी और दंडात्मक उपायों के बाद, भले ही वे रिश्तों को टूटने के कगार से वापस ला पाए हों, लेकिन आगे का रास्ता आसान नहीं है. फिर भी, इस पर चलना ज़रूरी है क्योंकि यह काफी अहम है.
ट्रंप जब पीएम मोदी के साथ खुशनुमा बातें कर थे, तभी खबर आई कि उन्होंने यूरोपीय यूनियन से भारत और चीन पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने को कहा है. चिंताजनक और बेचैन करने वाली इस खबर ने उत्साह को कुछ कम कर दिया. ज़ाहिर है, सब कुछ वैसा नहीं है जैसा दिखता है. इस उलझी हुई दुनिया में अनिश्चितता ही एकमात्र निश्चितता है.
सर्जिया गोर की भूमिका अहम
अब सारी उम्मीदें भारत में अमेरिकी राजदूत पद के लिए ट्रंप की ओर से नॉमिनेट किए गए सर्जियो गोर पर टिकी हैं. उनके दिल्ली आगमन से राजनीतिक तनाव कुछ कम हो सकता है. गोर ट्रंप परिवार के बेहद करीब हैं, खासकर उनके सबसे बड़े बेटे डॉन जूनियर और दामाद जेरेड कुशनर के. भारतीय राजनयिक उनके नॉमिनेशन को 'भारत-अमेरिका संबंधों के महत्व, प्राथमिकता के संकेत और दोस्ती के पुल को मजबूत करने की प्रतिबद्धता' के तौर पर देखते हैं. गोर की भूमिका अहम होगी क्योंकि वे सीधे राष्ट्रपति से संपर्क कर सकते हैं. लेकिन इस जर्जर रिश्ते को सुधारने के लिए दोनों पक्षों के कई वर्कर्स की जरूरत होगी.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

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