
पाकिस्तान-सऊदी अरब को फ्री हैंड... इस्लामिक देशों से मुलाकात, चीन की रफ्तार रोकने के लिए ट्रंप का पैंतरा!
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अमेरिका की मौन स्वीकृति के बिना पाकिस्तान-सऊदी अरब का डिफेंस समझौता, जिसके इतने बड़े निहितार्थ हैं, संभव नहीं होता. क्योंकि सऊदी अरब के अमेरिका के साथ गहरे रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते हैं. पाकिस्तान और सऊदी अरब का रक्षा क्षेत्र में इतना करीब आना एशिया में ट्रंप की रणनीति का विस्तार है जहां अमेरिका चीन के प्रभाव को संतुलित रखना चाहता है.
हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एशिया में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए ट्रंप ने पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देशों का सहारा लिया है. ये देश लंबे समय से चीन के रणनीतिक साझेदार रहे हैं, खासकर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव और अन्य आर्थिक-रक्षा सहयोग के माध्यम से.
ट्रंप की नई नीति में इन देशों के पक्ष में दिखती है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब ट्रंप की नीति अचानक से पाकिस्तान के पक्ष में जाती दिखी तो कई सुरक्षा विश्लेषक चौक गए. लेकिन इसके पीछे ट्रंप सरकार की सोची समझी रणनीति थी.
ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ 50 करोड़ डॉलर का खनिज निवेश समझौता किया है, जिसका लक्ष्य $6 ट्रिलियन की खनिज संपदा का दोहन है.
ट्रंप ने टैरिफ वॉर में पाकिस्तान को विशेष तरजीह दी और सामानों पर टैरिफ 29% से घटाकर 19% कर दिया.
यह कदम पाकिस्तान को चीन के साथ गहरे संबंधों से हटाकर अमेरिका के प्रभाव क्षेत्र में लाने की कोशिश है, खासकर जब पाकिस्तान चीन के BRI प्रोजेक्ट्स में शामिल है.
पाकिस्तान-सऊदी अरब का पैक्ट

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