
पाकिस्तान में 7 लड़कियों के सर्जन बनने पर भड़के कट्टरपंथी, बोले- इन्हें मां-बहन ही रहने दो सर्जन ना बनाओ
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पाकिस्तान के मशहूर डॉ. इकबाल ने अपनी 7 स्टूडेंट्स के साथ फोटो अपलोड करने के साथ लिखा- “कौन कहता है कि सर्जरी लड़कियों के लिए नहीं है. ये सातों (सर्जन) हैं. मैं कृतज्ञ हूं कि मुझे इन्हें ट्रेंड करने का मौका मिला.” डॉक्टर के इस ट्वीट पर बहुत से कट्टरपंथियों ने आपत्ति जताई.
डॉक्टर जावेद इकबाल पाकिस्तान के जाने-माने सर्जन हैं. उन्होंने एक ट्वीट में सात महिला स्टूडेंट्स की फोटो के साथ ट्वीट किया कि वे इन सभी को अपनी यूनिट में सर्जरी में ट्रेंनिंग दे रहे हैं. उनके इस ट्वीट के बाद कई यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया कि वे महिलाओं को करप्ट (भ्रष्ट) कर रहे हैं. Who says, surgery is not for girls. All seven of them are. I am humbled that I could train them in my unit pic.twitter.com/7ucEQ7bIfV
यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.

दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति बनने की आशंका बढ़ रही है. अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय नीतियां विवादों में हैं, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की तुलना हिटलर की तानाशाही से की जा रही है. वेनेज़ुएला पर हमला करने और ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की धमकी के बाद अमेरिका ने यूरोप के आठ NATO देशों पर टैरिफ लगाया है.








