
पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन.... मोदी से मुलाकात में भारत के पड़ोसी देशों पर क्या रहेगा ट्रंप का रुख?
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ORF के सीनियर फेलो सुशांत सरीन ने कहा कि आज से 6 महीने पहले भारत औऱ अमेरिका के बीच रूस बहुत बड़ा मुद्दा था, लेकिन अब ये सामने आ रहा है कि अमेरिका ने रूस के साथ बातचीत शुरू कर दी है. ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान की ओर अग्रसर हो रहे हैं. अगर रूस और चीन के बीच कोई दरार आती है तो ये हमारे लिए फायदेमंद है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दौरे पर हैं. पीएम मोदी और ट्रंप के बीच मुलाकात में व्यापार संतुलन सबसे बड़ा मुद्दा हो सकता है. इसके अलावा रक्षा सहयोग, आतंकवाद, भारत-प्रशांत क्षेत्र, चीन की दादागीरी, रूस-यूक्रेन युद्ध, H1B वीजा और गैंगस्टर जैसे मुद्दों पर भी बात हो सकती है. कुछ विशेषज्ञ कह रहे है कि ये भारत और अमेरिका की दोस्ती की नई उड़ान होगी, लेकिन चीन और पाकिस्तान के अलावा अब बांग्लादेश का भी मुद्दा है.
इस मामले पर ORF के सीनियर फेलो सुशांत सरीन ने कहा कि आज से 6 महीने पहले भारत औऱ अमेरिका के बीच रूस बहुत बड़ा मुद्दा था, लेकिन अब ये सामने आ रहा है कि अमेरिका ने रूस के साथ बातचीत शुरू कर दी है. ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान की ओर अग्रसर हो रहे हैं. अगर रूस और चीन के बीच कोई दरार आती है तो ये हमारे लिए फायदेमंद है. हालांकि भारत चीन के साथ कोई तनाव नहीं चाहता, लेकिन भारत की दिलचस्पी इस बात में हो सकती है कि जिस तरह से चीन एग्रेसिव हो रहा है, तो उसके ऊपर अंकुश लगे.
फिलहाल अमेरिका के रडार पर नहीं है पाकिस्तान
सुशांत सरीन ने कहा कि भारत और अमेरिका के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, जापान के साथ ही कई छोटे देश मिलकर काम कर सकते हैं. क्वॉड जैसी मरी हुई संस्था को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में पुनर्जीवित किया था. जहां तक पाकिस्तान का मामला है तो फिलहाल अमेरिका को पाकिस्तान में कोई दिलचस्पी नहीं है. हालांकि ये भी सच है कि अमेरिका पाकिस्तान पर कोई पाबंदियां लगाने नहीं जा रहा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान फिलहाल अमेरिका के रडार पर नहीं है.
चरमराई हुई है बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था
बांग्लादेश के मुद्दे पर सुशांत सरीन ने कहा कि इस्लामिक कट्टरपंथ को लेकर ट्रंप प्रशासन का सख्त रवैया है, बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी एक्टिव है, और जमात-ए-इस्लामी ने अमेरिका में काफी प्रचार किया था. अगर उस पर एक अंकुश लगता है तो बांग्लादेश पर दबाव बनेगा. इसके अलावा बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है, तो वह बहुत जल्दी प्रेशर में आ सकता है.

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