
पाकिस्तान जैसे मिस्र के हालात, भारत ने थामा है हाथ... दोनों देशों के बीच दोस्ती और कारोबार की कहानी
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India-Egypt trade: भारत के लिए उर्वरक निर्यात के मामले में मिस्र तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है. मिस्र से कच्चा तेल, उर्वरक, कॉटन और इन ऑर्गेनिक केमिकल समेत चमड़े और लोहे के उत्पादों को बड़ी मात्रा में मंगाया जाता है. दोनों देशों के बीच साल 1978 से द्विपक्षीय कारोबार समझौता लागू है.
भारत और मिस्र (India-Egypt) के बीच दशकों पुराने संबंधों को इस बार 26 जनवरी को नया आयाम मिलने वाला है. दोनों देशों के लिए ये दिन बेहद खास है. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी (Abdel Fattah al-Sisi) इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनेंगे. ये उनका तीसरा भारतीय दौरा होगा. दोनों देशों के बीच सिर्फ राजनायिक ही नहीं, बल्कि बड़ा व्यापारिक सहयोग भी है. बीते कुछ सालों में भारत-मिस्र के बीच व्यापार काफी बढ़ा है. हालांकि, मिस्र की आर्थिक स्थिति भी पाकिस्तान की तरह ही बदहाल है और भारत एक दोस्त की भूमिका अच्छे से निभा रहा है. भले ही मिस्र एक मुस्लिम देश है, लेकिन वो हमेशा से ही पाकिस्तानी नीतियों और आतंकवाद की खिलाफत करता रहा है.
दोनों देशों के बीच बढ़ रहा व्यापार भारत-मिस्र संयुक्त व्यापार परिषद की 25-26 जुलाई 2022 को काहिरा में हुई संयुक्त व्यापार समिति की पांचवीं बैठक के बाद जारी पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021-22 में दोनों देशों के बीच व्यापार में इससे पिछले वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में 75 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली है. मिस्र में भारत के राजदूत अजीत गुप्ते ने भी जानकारी देते हुए बताया है कि भारत और मिस्र के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार अपने हाई लेवल पर है.
व्यापार 12 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य वित्त वर्ष 2021-22 का डाटा देखें तो भारत और मिस्र के बीच व्यापार 7.26 अरब डॉलर को पार कर गया. अगले पांच साल में इसके 12 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. जहां मिस्र भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में शामिल है, तो वहीं भारत मिस्र के लिए छठा सबसे अहम व्यापारिक भागीदार है. दोनों देशों के बीच में साल 1978 से द्विपक्षीय कारोबार समझौता लागू है. बीते कुछ सालों में व्यापार में काफी बढ़ोतरी हुई है. दस सालों में दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात करीब पांच गुना बढ़ा है.
दोनों देश बड़े व्यापारिक भागीदार दोनों देशों के बीच व्यापार पर नजर डालें तो सामने आता है कि भारत आयात से ज्यादा मिस्र को निर्यात करता है. मिस्र खाद्य पदार्थों का बड़ा आयातक है और अपनी जरूरत का ज्यादातर हिस्सा दूसरे देशों से खरीदता है, इस लिस्ट में भारत का नाम भी शामिल है. हाल ही में भारत ने जब गेहूं के निर्यात पर पाबंदी लगाई थी, तब भी मिस्र को गेहूं को कई टन खेप भेजी थी.
बता दें रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine) मिस्र को गेहूं निर्यात करने वाले प्रमुख देश हैं, तकरीबन 80 फीसदी जरूरत का गेहूं यहां से मिलता है. लेकिन दोनों देशों के बीच युद्ध से सप्लाई चेन पर पड़े असर के बीच मिस्र में गेहूं की किल्लत चरम पर पहुंच गई थी. इसके बाद मिस्र भारत से बड़े पैमाने पर गेहूं का आयात करने लगा और जून 2022 में भारत से 1.8 लाख टन गेहूं भेजा गया था. इसके अलावा मिस्र, भारत से सूती धागे, तिल, कॉफी, जड़ी बूटी, तंबाकू और दालों का निर्यात करता है.
दूसरी ओर भारत द्वारा मिस्र से खरीदे जाने वाले सामानों की बात करें तो उर्वरक निर्यात के मामले में मिस्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है. पहले और दूसरे नंबर पर क्रमश: सऊदी अरब और ओमान का नाम आता है. भारत, मिस्र से कच्चा तेल, उर्वरक, कॉटन और इन ऑर्गेनिक केमिकल समेत चमड़े और लोहे के उत्पादों का आयात बड़ी मात्रा में करता है.

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