
पाकिस्तान की ड्रग्स, पंजाब में कमाई और कनाडा में फंडिंग... ऐसे चल रहा है खालिस्तानी आतंक का खेल
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अमेरिका से कनाडा के बीच घूमता गुरपतवंत सिंह पन्नू हो, मारा जा चुका हरदीप सिंह निज्जर हो, कनाडा में छिपा अर्शदीप डल्ला हो, लखबीर लांडा हो या भारत का मोस्ट वॉन्टेड गोल्डी बरार हो. इन सारे अपराधियों, गैंगस्टर्स और आतंकवादियों का गठजोड़ कनाडा की जमीन पर फलफूल रहा है.
कनाडा में आज जो भारत विरोधी हालात हैं, इसके दो सबसे बड़े कारण हैं. एक तो कनाडा में भारतीय मूल की सिख आबादी बड़ी तादाद में है और अस्सी-नब्बे के दशक से वहां खालिस्तान समर्थकों को खाद-पानी दिया जाता रहा है. दूसरी वजह ये है कि कनाडा की राजनीति में कुर्सी का हित साधने के लिए राजनीतिक दल भी खालिस्तान समर्थक अपराधियों, गैंगस्टर्स और आतंकवादियों को पनाह देते रहे हैं.
खालिस्तान समर्थक गैंगस्टर्स और आतंकवादियों के क्या-क्या धंधे हैं और क्या है इनकी फंडिंग का नेटवर्क. ये सब आपको बताएंगे, लेकिन पहले जान लें कि जस्टिन ट्रुडो कैसे सिर्फ निज्जर की हत्या पर सेलेक्टिव शोर मचा रहे हैं और क्यों?
अमेरिका से कनाडा के बीच घूमता गुरपतवंत सिंह पन्नू हो, मारा जा चुका हरदीप सिंह निज्जर हो, कनाडा में छिपा अर्शदीप डल्ला हो, लखबीर लांडा हो या भारत का मोस्ट वॉन्टेड गोल्डी बरार हो. इन सारे अपराधियों, गैंगस्टर्स और आतंकवादियों का गठजोड़ कनाडा की जमीन पर फलफूल रहा है.
इस गैंग के लोग पाकिस्तान से ड्रग्स लाकर पंजाब में बेचते हैं. इससे मिला पैसा कनाडा में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों तक जाता है. कनाडा में भी खालिस्तान समर्थक गैंगस्टर्स ड्रग्स के धंधे में शामिल हैं. उन सभी के बीच भी पैसे की बंदरबांट को लेकर आपसी गैंगवॉर चलता रहता है.
खबर है कि ऐसे ही एक गैंगवॉर में 2022 में निज्जर ने कनाडा के सर्री शहर में ही अपने साथी और खालिस्तान समर्थक रिपुदमन सिंह मलिक की हत्या करा दी थी. इसमें कनाडा पुलिस ने दो स्थानीय अपराधियों को ही पकड़ रखा है.
तब कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रुडो को याद नहीं आया कि कनाडा की जमीन पर कनाडा के नागरिक की हत्या कितनी चिंताजनक है. तब ट्रुडो परेशान नहीं हुए क्योंकि उस हत्या में मारा गया रिपुदमन मलिक हरदीप निज्जर के मुकाबले कम फायदेमंद और छोटा नाम था. लेकिन जिस खालिस्तान समर्थकों की फंडिंग से ट्रुडो की पार्टी चल रही है. उसी संगठन के एक घोषित आतंकवादी के मारे जाने पर ट्रुडो बहुत चिंतित हो गए. वो भी इसलिए क्योंकि हत्या के तीन महीने बीत जाने के बावजूद कनाडा निज्जर की हत्या का सच नहीं बता पा रहा.

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