
'पाकिस्तानी हिंदुओं में डर का माहौल है', सिंध के मंत्री ने सीमा हैदर पर धमकी देने वाले डाकुओं से लगाई ये गुहार
AajTak
सीमा हैदर को वापस पाकिस्तान भेजने को लेकर पाकिस्तान के डाकुओं ने धमकी दी थी. उन्होंने कहा था कि सीमा को वापस भेजा जाए वरना वो हिंदू मंदिरों पर हमले करेंगे. इस धमकी के बाद सिंध के एक मंदिर पर हमला किया गया था. इस हमले को लेकर अब सिंध के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने डाकुओं से एक गुजारिश की है.
पाकिस्तान से अपने चार बच्चों के साथ भागकर भारत आईं सीमा हैदर भारत से लेकर पाकिस्तान में भी चर्चा में बनी हुई हैं. पाकिस्तान के सिंध प्रांत की रहने वाली सीमा अपना घर-परिवार छोड़कर अपने प्रेमी सचिन के पास रहने भारत आ गई हैं. इसे लेकर पाकिस्तान के एक वर्ग में काफी आक्रोश है. पाकिस्तान के डकैत रानो शार के मंदिरों पर हमले की धमकी के बाद बीते रविवार को सिंध के काशमोर के एक मंदिर पर हमला हुआ था. सिंध में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे हमलों को देखते हुए सिंध के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री जियानचंद एस्सरानी ने डकैतों से आग्रह किया है कि वे हिंदू समुदाय को नुकसान न पहुंचाएं.
पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, सिंध के मंत्री ने यह अपील सिंध प्रांत के विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए की. विधानसभा में मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान (MQM-P) के विधायक मंगला शर्मा ने कहा कि सिंध के नदी क्षेत्रों में रहने वाले भारी हथियारों से लैस डाकुओं ने सिंध में एक मंदिर पर हमला करने के लिए रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि मंदिर पर हमले की घटना के बाद से हिंदू समुदाय में डर का माहौल है.
सदन में बोलते हुए मंत्री जियानचंद एस्सरानी ने कहा कि डाकू भी इसी देश के रहने वाले हैं और उन्हें ऐसा कोई काम करने से बचना चाहिए जो पाकिस्तान को बदनाम कर सकता है. उन्होंने कहा कि मुझे डर है, अगर सिंध प्रांत में रहने वाले हिंदुओं को कोई नुकसान पहुंचाया जाता है तो दुनियाभर में पाकिस्तान की बदनामी होगी.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मुस्लिम बहुसंख्यक धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखे हैं और उन्हें सुरक्षा देने की पूरी कोशिश की है.
उन्होंने कहा, 'हमें यही जीना है और यही मरना है. पाकिस्तान में हिंदू समुदाय ने कोई गलत काम नहीं किया है, इसलिए उनके मंदिरों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए.'
सिंध में मंदिरों की सुरक्षा हाई अलर्ट पर

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









