
पहले विदेश दौरे में सऊदी अरब ही क्यों जाते हैं ट्रंप? MBS से दोस्ती, ईरान या इस्लामिक देश का पैसा... क्या है वजह
AajTak
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद अपने पहले विदेश दौरे में सऊदी अरब जाने वाले हैं. उन्होंने कहा था कि सऊदी अरब ने अमेरिका में निवेश का फैसला किया है इसलिए वो पहले सऊदी जाएंगे. उनके सत्ता में आने के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी का कद भी बढ़ गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस लौटने के बाद अपने पहले विदेश दौरे में सऊदी अरब जाने की योजना बना रहे हैं. बताया जा रहा है कि ट्रंप के सऊदी दौरे का प्लान अभी बनाया जा रहा है. न्यूज वेबसाइट एक्सियोस ने रविवार को ट्रंप के सऊदी जाने के प्लान की जानकारी देते हुए बताया कि ट्रंप प्रशासन इजरायल और फिलिस्तीनी समूह हमास के बीच गाजा में युद्ध विराम को बहाल करने की कोशिश में है. ट्रंप प्रशासन हमास से बाकी के बंधकों को रिहा करवाने की कोशिश कर रहा है और राष्ट्रपति इसी बीच सऊदी अरब जा सकते हैं.
पहले विदेश दौरे में सऊदी अरब क्यों जा रहे ट्रंप?
ट्रंप ने 6 मार्च को भी मीडिया से बात करते हुए कहा था कि वो "अगले डेढ़ महीने में" सऊदी अरब का दौरा करेंगे. उन्होंने कहा था, 'मैं सऊदी अरब जा रहा हूं. आम तौर पर आपको पहले ब्रिटेन जाना चाहिए था, पिछली बार मैं सऊदी अरब गया था. उन्होंने 450 अरब डॉलर का निवेश किया था.'
अपने दूसरे कार्यकाल के पहले विदेश दौरे में सऊदी अरब जाने को लेकर उन्होंने आगे कहा था, 'इस बार मैंने कहा कि मैं तभी जाऊंगा जब आप अमेरिकी कंपनियों को एक खरब डॉलर देंगे. इसका मतलब है कि सऊदी चार सालों में अमेरिका में एक खरब डॉलर लगाएगा. वे ऐसा करने के लिए सहमत हो गया है इसलिए मैं वहां जा रहा हूं.'
एक अमेरिकी अधिकारी और मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया है कि ट्रंप मई के मध्य में सऊदी अरब का दौरा करेंगे. अमेरिकी अधिकारी ने बताया, 'सऊदी दौरे में विदेशी निवेश, खाड़ी देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने और मध्य-पूर्व में संघर्ष की समाप्ति पर बात होगी.'
ट्रंप के आने से बढ़ा सऊदी अरब का 'कद'

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









