
पहले जेलेंस्की, अब पुतिन का कॉल पीएम मोदी को... कैसे भारत रूस-यूक्रेन वार्ता का 'Invisible partner' बना हुआ है
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यूक्रेन में युद्धबंदी के लिए दुनिया के दिग्गज भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति के दफ्तर में जुड़े थे लेकिन वहां से हजारों किलोमीटर दूर होने के बावजूद नई दिल्ली इस बेहद अहम कूटनीतिक डायलॉग की एक धुरी रहा है. यही वजह है कि अलास्का मीटिंग खत्म होते ही पुतिन पीएम मोदी को फोन करते हैं और वार्ता में प्रगति की जिम्मेदारी भारत को देते हैं. भारत की व्यापारिक और कूटनीतिक स्थिति ऐसी है कि वह यूक्रेन सीजफायर को प्रभावित करने की क्षमता रखता है.
नई दिल्ली से यूक्रेन की दूरी लगभग 5000 किलोमीटर है. लेकिन तीन साल से ज्यादा समय से चल रही इस लड़ाई में भारत का किरदार अहम हो गया है. रूस-यूक्रेन संघर्ष में भारत अपनी तटस्थ और संतुलित कूटनीति के जरिए एक अदृश्य लेकिन महत्वपूर्ण साझेदार (Invisible Partner) की भूमिका निभाई है. भारत की रूस से कच्चा तेल खरीदने की क्षमता ने नई दिल्ली को इस जंग को प्रभावित करने की आर्थिक ताकत दे दी है.
भारत प्रत्यक्ष रूप से भले ही इस युद्ध को प्रभावित नहीं कर रहा है लेकिन अमेरिका और यूरोप कहते हैं कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर रूस के वॉर मशीन की फंडिंग कर रहा है.
इसके अलावा रूस और यूक्रेन दोनों पक्षों के साथ भारत के मजबूत संबंध, उसकी रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक मंचों पर संवाद व शांति की वकालत ने इसे इस संघर्ष में एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में स्थापित किया है.
अलास्का में पुतिन और ट्रंप के बीच बहुप्रतिक्षित मुलाकात ने रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करने में उत्प्रेरक का काम किया है. इस मुलाकात के बाद ही व्हाइट हाउस में ट्रंप की जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के साथ मुलाकात की पृष्ठभूमि तैयार हुई.
पुतिन-जेलेंस्की का पीएम मोदी को कॉल
अलास्का से लौटते ही रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को फोन लगाया और इस वार्ता में प्रगति की जानकारी दी. इस दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और सभी प्रयासों का समर्थन करने की बात कही. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा की और निरंतर संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई.

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