
पलकें नहीं झपका सकी एसिड अटैक सर्वाइवर, बैंंक ने खाता खोलने से किया मना
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प्रज्ञा पर एसिड अटैक हुआ था. इसके कारण उनके चेहरा पर गंभीर जख्म हो गया था. धीरे-धीरे उनके जख्म ठीक हुए थे. हाल ही में प्रज्ञा बैंक में अपना सेविंग अकाउंट खुलवाने के लिए पहुंची थी. अकाउंट ओपन करने के लिए उनकी केवाईसी (KYC) होनी थी.
कर्नाटक के बेंगलुरु में रहने वाली एसिड अटैक सर्वाइवर इस खास वजह से चर्चा में है. उन्होंने बैंक में सेविंग अकाउंट खुलवाने के लिए आवेदन दिया था. इसके लिए प्रज्ञा नाम की एसिड अटैक सर्वाइवर को केवाईसी कराने के लिए बुलाया गया. मगर, पलक नहीं झपका पाने के कारण प्रज्ञा का बैंक में अकाउंट नहीं खुल सका. इसके बाद प्रज्ञा अपनी इस परेशानी को सोशल मीडिया के जरिए लोगों के साथ शेयर की. इसका असर यह हुआ कि बैंक के अधिकारियों ने प्रज्ञा से संपर्क किया और फिर उनका अकाउंट ओपन किया गया.
दरअसल, प्रज्ञा पर एसिड अटैक हुआ था. इसके कारण उनके चेहरा पर गंभीर जख्म हो गया था. धीरे-धीरे उनके जख्म ठीक हुए थे. हाल ही में प्रज्ञा बैंक में अपना सेविंग अकाउंट खुलवाने के लिए पहुंची थी. अकाउंट ओपन करने के लिए उनकी केवाईसी (KYC) होनी थी. केवाईसी के लिए प्रज्ञा का फोटो क्लिक किया, इस दौरान पलकें झपकाना होती हैं, तब जाकर फोटो क्लिक होता है. मगर, प्रज्ञा ऐसा नहीं कर पाईं. इसके कारण उनका बैंक अकाउंट के लिए आवेदन स्वीकार नहीं किया गया. परेशान होकर प्रज्ञा घर आ गईं.
सोशल मीडिया की मदद से परेशानी हुई हल
मगर, उन्हें लगा कि ऐस परेशानी से और भी एसिड अटैक सर्वाइवर को भी गुजरना पड़ता होगा. इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी इस परेशानी के बारे में शेयर किया. साथ ही उन्होंने केवाईसी के नियमों को बदलने के लिए भी सुझाव दिए. सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने का यह असर हुआ कि बैंक के अधिकारियों ने खुद प्रज्ञा से संपर्क किया और उनका बैंक अकाउंट खुलवाया.
बदलने चाहिए केवाईसी के नियम: प्रज्ञा
इस घटना को लेकर प्रज्ञा का कहना है कि अन्य एसिड अटैक सर्वाइवर्स को उसके जैसी समस्या से नहीं गुजरना चाहिए. वह अपने सोशल नेटवर्क की वजह से बैंक की नजरों में आ सकीं. सैकड़ों अन्य एसिड अटैक सर्वाइवर्स के साथ यह समान लाभ नहीं है. प्रज्ञा इस बात पर जोर देती हैं कि बैंकों को एसिड अटैक सर्वाइवर्स और पलकें नहीं झपकाने वाले लोगों के लिए अन्य उपाय अपनाने चाहिए जैसे हाथ हिलाना, बोलना आदि. प्रज्ञा का कहना है कि विशेषज्ञों को केवाईसी के दौरान समाधान के रूप में अन्य वैकल्पिक तरीकों की तरफ ध्यान देना चाहिए.

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